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संभाजीनगर मनपा में भाजपा के हाथ से जाएगी सत्ता?

-२३ नगरसेवकों को अयोग्यता का नोटिस, भाजपा के ७ पार्षद भी शामिल
-सुनवाई के बाद बदल सकते हैं सत्ता के समीकरण

सामना संवाददाता / मुंबई

छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की राजनीति में बड़ा राजनीतिक भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। चुनाव में महायुति के उम्मीदवारों ने जैसे-तैसे नामांकन पत्र दाखिल किए और जीत हासिल की, लेकिन अब जांच में कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया जा रहा है। जांच के दौरान कथित गड़बड़ियां पाए जाने पर मनपा के २३ नगरसेवकों को अयोग्यता का नोटिस जारी किया गया है। इससे सत्तारूढ़ महायुति के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है।
इन २३ नगरसेवकों में भाजपा के ७ और एमआईएम के १६ पार्षद शामिल हैं। यदि सुनवाई के बाद इनमें से कुछ पार्षद अयोग्य घोषित होते हैं, तो इसका सीधा असर मनपा के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में भाजपा के हाथ से सत्ता भी जा सकती है।
दस्तावेजों और पात्रता पर उठे सवाल
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब मनपा चुनाव में नगरसेवकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और चुनावी पात्रता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। चुनाव में पराजित उम्मीदवारों की ओर से महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम के तहत दायर याचिकाओं में कथित अवैध निर्माण, अतिक्रमण और दो से अधिक संतान होने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
शिकायतों के बाद नगर सचिव, जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग और अतिक्रमण विभाग की ओर से प्राथमिक जांच की गई। अब प्रशासन ने संबंधित २३ पार्षदों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अगस्त और सितंबर में इन मामलों की सुनवाई प्रस्तावित है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने या जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है।
महायुति की बढ़ी चिंता
यदि सुनवाई के बाद किसी नगरसेवक की सदस्यता रद्द होती है, तो मनपा में संख्या बल और सत्ता के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। भाजपा के हाथ से सत्ता खिसक सकती है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया जा रहा है। फिलहाल सभी की नजरें अगस्त और सितंबर में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
सुनवाई के नतीजे पर टिकीं निगाहें
२३ पार्षदों के खिलाफ शुरू हुई यह प्रक्रिया केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य का मामला नहीं है, बल्कि इसके अंतिम परिणाम से छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की सत्ता का पूरा राजनीतिक गणित बदल सकता है।
चुनावी प्रक्रिया पर तेज हुई बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने मनपा चुनाव प्रक्रिया और चुनाव के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की जांच को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव के दौरान कई उम्मीदवारों की पात्रता और दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। विपक्षी नेताओं का दावा है कि शिकायतों और जांच के माध्यम से कई महत्वपूर्ण अनियमितताएं सामने आने की संभावना है।

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