सामना संवाददाता / मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक नारों और भाषा को लेकर पीएम मोदी की टिप्पणी पर गायक विशाल ददलानी ने तीखा पलटवार किया है। विशाल ददलानी ने पीएम मोदी के वीडियो पर तंज कसते हुए कहा कि गालियों से ज्यादा जरूरी छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देना है। उन्होंने सलाह दी- ‘घमंड बंद करें, पीआर कम करें और शिक्षा व्यवस्था में सुधार करें।’ विशाल ने सवाल उठाया कि छात्रों के गुस्से का कारण समझने के बजाय केवल उनकी भाषा पर ध्यान क्यों दिया जा रहा है?
विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में कहा कि अगर युवाओं की नाराजगी पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था की खामियों और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर है, तो सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि छात्रों की पीड़ा, संघर्ष और समस्याओं पर उतनी चिंता नहीं दिखाई जाती, लेकिन गुस्से में निकले शब्दों पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, आंसू गैस, लाठीचार्ज जैसे मुद्दों पर चर्चा कम हुई, जबकि गालियों को लेकर ज्यादा नाराजगी दिखाई गई। विशाल ने कहा कि युवाओं के आक्रोश को समझने की जरूरत है और उनकी आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए। विशाल ददलानी ने प्रधानमंत्री को सलाह देते हुए कहा कि सरकार को प्रचार और छवि निर्माण से ज्यादा शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को प्रभावित करने के लिए वीडियो और प्रचार अभियान चलाने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के युवा विरोधी नहीं हैं, बल्कि बेहतर भविष्य चाहते हैं। यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, परीक्षाओं में पारदर्शिता आएगी और छात्रों की समस्याओं का समाधान होगा, तो यही युवा सरकार की सराहना करेंगे। विशाल की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। जहां कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थकों ने इसे राजनीतिक हमला बताया है। छात्र आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को लेकर यह विवाद अब नया राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
