मुख्यपृष्ठनए समाचारक्या ‘न्याय' भी मैनहोल में गिर गया?

क्या ‘न्याय’ भी मैनहोल में गिर गया?

-एक महीने बाद भी रिपोर्ट नहीं, ठेकेदार पर नरमी

-पीड़ित परिवार को अब भी इंसाफ का इंतजार

-आखिर किसे बचाने में जुटा है प्रशासन?

सामना संवाददाता / मुंबई
साकीनाका में खुले मैनहोल में गिरकर ५५ वर्षीय असलम शेख की दर्दनाक मौत को एक महीना बीत चुका है, लेकिन न्याय अब भी फाइलों में दफन नजर आ रहा है। मनपा की जांच समिति अब तक अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर सकी है। चार अधिकारियों को निलंबित कर कार्रवाई का दावा जरूर किया गया, लेकिन जिस ठेकेदार पर मैनहोल खुला छोड़ने का आरोप है, उसके खिलाफ न गिरफ्तारी हुई और न ही कोई कठोर कार्रवाई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले में भी आरोपी को बचाने के लिए लीपापोती की जा रही है और न्याय भी खुले मैनहोल में गिर गया है?
विपक्ष अब जांच रिपोर्ट जारी करने में हो रही देरी पर सवाल उठा रहा है, साथ ही सभी जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपायों की मांग कर रहा है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई एक ऐसी त्रासदी थी जिसे टाला जा सकता था। इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया गया है, क्या आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय और पर्याप्त मुआवजा मिला है? लगभग एक महीना बीत चुका है और जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, मनपा में कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने कहा, न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है।
रिपोर्ट गायब, सवाल बरकरार!
साकीनाका मैनहोल हादसे को एक महीना बीत गया, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई। चार अधिकारी निलंबित हुए, जबकि आरोपित ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई। विपक्ष ने इसे मनपा की लीपापोती बताते हुए तत्काल रिपोर्ट जारी करने और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की।

अन्य समाचार