सुरेश गोलानी
२० नवंबर २०२४ को संपन्न महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले शहर की सड़कों की खराब हालत और सैकड़ों गड्ढों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए पूर्व भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने एटीवी बाइक चलाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।
अब नरेंद्र मेहता मीरा-भायंदर विधानसभा क्षेत्र से सत्ताधारी भाजपा के विधायक हैं, लेकिन दिन-ब-दिन शहर की ज्यादातर सड़कों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। इससे भाजपा नेताओं की कथनी और करनी के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से उजागर होता है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे और उनकी खराब स्थिति जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। ऐसे में मेहता का एटीवी बाइक वाला स्टंट एक बार फिर चर्चा में है।
शनिवार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने मेहता के उसी अंदाज में हाटकेश सिग्नल से लेकर गोल्डन नेस्ट सर्कल तक एटीवी बाइक चलाकर मौजूदा हालात और भाजपा शासित मनपा तथा मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की कथित नाकामी पर तंज कसा। कार्यकर्ताओं ने आंदोलन कर अपना विरोध भी दर्ज कराया।
एक तरफ ये उधड़ी हुई सड़कें हर दिन और हर पल दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मनपा से जुड़े लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और ठेकेदार अपनी मस्ती और पैसा कमाने में व्यस्त हैं। हालत यह है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर बीते सालभर में इन सड़कों पर लाखों रुपए खर्च हो गए, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी हालत फिर से जर्जर हो गई। हाल ही में बनाई गई और मरम्मत की गई अधिकांश सड़कों की खराब स्थिति मनपा ठेकेदारों पर लागू दो साल की दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) के प्रभावी कार्यान्वयन पर सवालिया निशान खड़ा करती है।
थर्ड पार्टी ऑडिट भी कागजों में सिमटी
इसके अलावा गड्ढों को भरने के काम पर नजर रखने के उद्देश्य से अनिवार्य तीसरे पक्ष के निरीक्षण (थर्ड पार्टी ऑडिट) की व्यवस्था भी कथित रूप से सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है। आलम यह है कि मनपा आयुक्त के मीरा रोड स्थित कनकिया इलाके में सरकारी बंगले की ओर जाने वाली हाल ही में निर्मित सीसी सड़क में अभी से ही दरारें आने लगी हैं।
