-पुरानी शिकायतों के निस्तारण में भी मिली भारी लापरवाही…डीएम ने 24 अधिकारियों को थमाए नोटिस
राजेश सरकार / प्रयागराज
शासन भले ही समाधान दिवस को जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का मंच बता रहा हो, लेकिन बारा तहसील में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस की तस्वीर सरकारी कामकाज की सुस्ती और लापरवाही की हकीकत बयां करती नजर आई। कुल 539 शिकायतें अधिकारियों के सामने पहुंचीं, लेकिन मौके पर महज 14 मामलों का ही निस्तारण हो सका। यानी अधिकांश फरियादी एक बार फिर आश्वासनों के सहारे घर लौटने को मजबूर हुए।
समाधान दिवस में जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं। बारा और करछना तहसील क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। शिकायतों की भारी संख्या और मौके पर बेहद कम निस्तारण ने सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।
समीक्षा के दौरान पहले के समाधान दिवसों में दर्ज शिकायतों की पड़ताल की गई तो कई मामलों में निस्तारण सिर्फ कागजों तक सीमित मिला। कहीं अधूरी कार्रवाई की गई तो कहीं बिना संतोषजनक समाधान के ही शिकायतें निस्तारित दिखा दी गईं। यह स्थिति सामने आते ही जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए 24 राजस्व एवं अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब कर लिया।
डीएम ने दो टूक कहा कि शिकायतों का निस्तारण केवल फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रत्येक मामले की मौके पर जांच कर निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जनता की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान कर उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। समाधान दिवस के दौरान प्राप्त सभी शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।
