राजेश सरकार / प्रयागराज
कमिश्नरेट के बारा तहसील क्षेत्र स्थित मकदुम्बा पहाड़ पर लगातार हो रही ब्लास्टिंग को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रविवार को पहाड़ पर राष्ट्रीय पक्षी मोर के मृत मिलने के बाद ग्रामीणों और किसानों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। लोगों का आरोप है कि क्रेशर प्लांटों में पत्थर तोड़ने के लिए रोजाना किए जा रहे विस्फोटों ने मोरों का प्राकृतिक आशियाना उजाड़ दिया है और अब उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेज धमाकों से मोर बुरी तरह भयभीत होकर घायल हो जाते हैं और कई बार उनकी मौत भी हो जाती है। उनका आरोप है कि शिकायतों का अंबार लगने के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं, जबकि राष्ट्रीय पक्षी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की ही है।
भारतीय किसान यूनियन प्रयाग के जिलाध्यक्ष ऋषि कुमार पांडेय ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी जिलाधिकारी मनीष वर्मा को ज्ञापन देकर पहाड़ पर हो रही ब्लास्टिंग और कथित अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की जा चुकी है। उनका कहना है कि पहाड़ बड़ी संख्या में मोरों का प्राकृतिक आवास है, लेकिन लगातार चल रही खनन गतिविधियां और विस्फोट इनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। किसानों का आरोप है कि कई बार शिकायती पत्र देने के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रही। रविवार को मोर के मृत मिलने की घटना ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि राष्ट्रीय पक्षी भी सुरक्षित नहीं है, तो वन्यजीव संरक्षण के सरकारी दावे आखिर कितने कारगर हैं? किसान यूनियन ने मांग की है कि मृत मिले मोर की मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मकदुम्बा पहाड़ पर संचालित क्रेशर प्लांटों और खनन गतिविधियों की जांच हो तथा नियमों का उल्लंघन मिलने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा और जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
राष्ट्रीय पक्षी को राजकीय सम्मान, लेकिन मौत का राज अब भी दफन!
मकदुम्बा पहाड़ की ब्लास्टिंग से दूरी बताकर वन विभाग ने झाड़ा पल्ला, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
शंकरगढ़ वन रेंज क्षेत्र में मृत मिले राष्ट्रीय पक्षी मोर का रविवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन उसकी मौत आखिर कैसे हुई, इसका जवाब अब भी वन विभाग के पास नहीं है। बारा के असवां स्कूल के पीछे एक पेड़ के नीचे मृत मिले मोर को पहले पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और बाद में शंकरगढ़ वन रेंज कार्यालय परिसर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफना दिया गया। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो मौत के असली कारणों से पर्दा उठाएगी।
वन क्षेत्राधिकारी अजय कुमार के मुताबिक सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और मोर के शव को कब्जे में लेकर बारा पशु चिकित्सालय में पोस्टमार्टम कराया गया। उन्होंने बताया कि मृत मोर जिस स्थान पर मिला, वह मकदुम्बा पहाड़ से काफी दूर है। ऐसे में फिलहाल किसी भी कारण को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
हालांकि, क्षेत्र में लगातार हो रही पहाड़ों की ब्लास्टिंग और वन्यजीवों पर उसके प्रभाव को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में मोर की मौत ने एक बार फिर वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। वन विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही, मानव हस्तक्षेप या अन्य कारण सामने आते हैं तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, राष्ट्रीय पक्षी को राजकीय सम्मान तो मिल गया, लेकिन उसकी मौत का सच अब भी फाइलों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कैद है। जनता की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर दोषियों तक भी पहुंचेगी।
