सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा की वरिष्ठ नेता और मंत्री पंकजा मुंडे के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। बीड जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पंकजा मुंडे ने राजनीति से संन्यास लेने की इच्छा जताते हुए कहा कि अब उन्हें राजनीति से थकान महसूस होने लगी है और कई बार लगता है कि उन्हें सार्वजनिक जीवन से रिटायर हो जाना चाहिए।
पंकजा मुंडे के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हालांकि, अपने भाषण के अगले ही हिस्से में उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता का उत्साह और विकास की उम्मीदें उन्हें फिर से ऊर्जा देती हैं और वह जनहित के कार्यों के लिए पूरी ताकत के साथ काम करती रहेंगी।
अपने संबोधन में पंकजा मुंडे ने क्षेत्र के विकास और अपने लंबे राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले यहां दो लेन की सड़क थी, जबकि अब चार और छह लेन की सड़क का काम चल रहा है। हालांकि, कई स्थानों पर गड्ढों के कारण सड़क की स्थिति खराब है, जिससे उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। उन्होंने बताया कि रास्ते में ही उन्होंने अपने निजी सहायक (पीए) से कहा कि अब उन्हें इस सब से थकान महसूस होने लगी है।
उन्होंने कहा कि वह २४ वर्ष की उम्र से राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और अब ४८ वर्ष की हो चुकी हैं यानी पिछले २४ वर्षों से लगातार उसी क्षेत्र, उन्हीं लोगों और उसी राजनीतिक व्यवस्था के बीच काम कर रही हैं। इसी दौरान उन्होंने अपने पीए से कहा, ‘अब थकान हो गई है, लगता है राजनीति से रिटायर हो जाना चाहिए।’
हालांकि, पंकजा मुंडे ने यह भी कहा कि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद जब उन्होंने लोगों का उत्साह देखा और गरीब परिवारों की आंखों में विकास की उम्मीद महसूस की तो उन्हें लगा कि उनका काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास और उत्साह उन्हें नई ऊर्जा देता है और इसी कारण वह जनसेवा के लिए पहले की तरह पूरी ताकत के साथ काम करती रहेंगी।
