सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा की स्थायी समिति में बहुमत बनाए रखने के लिए सत्ताधारी भाजपा को एक बीमार नगरसेवक को अस्पताल से सीधे बैठक में लाने की नौबत आ गई। भाजपा की यह लाचारी सामने आने के बाद मुंबई की राजनीतिक गलियों में भाजपा की नीतियों और वसूलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या सत्ताधारी दल के पास सदन में बहुमत का आंकड़ा इतना कमजोर हो गया है कि महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने के लिए अस्पताल में भर्ती नगरसेवक को भी बैठक में लाना पड़ रहा है?
बता दें कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मतदान होना था। समिति में सत्ताधारी पक्ष के पास १३ सदस्य हैं, जबकि विपक्ष के १२ सदस्य हैं यानी सत्ताधारी पक्ष के पास महज एक सदस्य का बहुमत है। ऐसे में बैठक के दिन सत्ताधारी खेमे के तीन सदस्य अनुपस्थित थे।
शिंदे गुट की यामिनी जाधव अस्पताल में भर्ती थीं, भाजपा की राखी जाधव छुट्टी पर थीं और भाजपा के नगरसेवक शिवकुमार झा भी अस्पताल में भर्ती थे। ऐसे में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मतदान के दौरान बहुमत बनाए रखने के लिए शिवकुमार झा को अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर सीधे स्थायी समिति की बैठक में लाया गया।
भाजपा सत्ता पिपासु
राजनीतिक गलियारों में भाजपा की लाचारी को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। सत्ता की लालची भाजपा अपने बीमार नगरसेवकों को भी चैन से नहीं इलाज कराने दे रही है। उधर, विपक्ष ने सत्ताधारी भाजपा की चुटकी ली है। विपक्ष ने कहा कि भाजपा को अपने प्रस्ताव पारित कराने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ रही है। बीमार नगरसेवक को भी अस्पताल से सीधे समिति की बैठक में लाना पड़ रहा है। यह सब सत्ता का पिपासु है।
बीमार हालत में भी बैठक में पहुंचे शिवकुमार झा
शिवकुमार झा की तबीयत खराब होने के बावजूद उन्हें बैठक में उपस्थित कराया गया। वह भागलपुरी शॉल ओढ़े और कानों पर रूमाल बांधे बैठक में पहुंचे। उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी और बैठक में भी वे ठंडी से परेशान नजर आ रहे थे। वहां जीएसटी से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान होने के कुछ मिनट बाद ही उन्हें वापस जाने की अनुमति दी गई।
