मुख्यपृष्ठस्तंभदिल्ली लाइव: ३० साल का घमंड ३० दिन में चूर-चूर!

दिल्ली लाइव: ३० साल का घमंड ३० दिन में चूर-चूर!

अरुण कुमार गुप्ता

बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट के उप चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर यानी पीके ने जीत हासिल कर भाजपा के घमंड को चूर-चूर कर दिया है। यहां यह बात ध्यान देने वाली है कि इस सीट पर १९९५ से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। यही नहीं, यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की भी रही है। यानी ३० साल के घमंड को प्रशांत किशोर ने ३० दिन में तोड़कर साबित कर दिया है कि घमंड तो रावण का भी नहीं रहा। बांकीपुर को आप छोटा गुजरात समझ सकते हैं। यदि बांकीपुर में बीजेपी हार सकती है तो बिहार की किसी भी सीट पर हार सकती है। याद कीजिए, एक बार भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने यह भी कह दिया था कि यदि हम बांकीपुर से किसी कुत्ते या बिल्ली को टिकट दे दें, तो वह भी मोदी के नाम पर चुनाव जीत जाएगा। घमंडी भाजपाई इतने घमंड में आ गए थे कि बिहार के लोगों का अपमान करने में भी गुरेज नहीं कर रहे थे। बीजेपी के घमंड को बांकीपुर के लोगों ने धूल चटा दी है। यह वही नितिन नवीन हैं जिन्होंने गत दिनों लखनऊ में रोड शो के दौरान अपने स्वागत में राम भक्त हनुमान जी को सड़क पर नचवा दिया था। इसी हनुमान जी ने अपनी गदा से भाजपाइयों का घमंड चूर कर दिया है। अब कुछ गोदी मीडिया के पत्तलकार यह अफवाह पैâला रहे हैं कि बीजेपी जानबूझकर चुनाव हार गई है, लेकिन कोई पार्टी वोट चोरी करके, चुनाव आयोग को कब्जे में करके, चुनाव जीत तो सकती है, लेकिन खुद अपनी मर्जी से चुनाव हार नहीं सकती है। गोदी मीडिया इसलिए नैरेटिव पैâला रहा है ताकि उनके पापा पर सवाल खड़ा न हो। चुनाव जीत गए तो पापा की वजह से जीते और हार गए तो अपनी मर्जी से हारे। गोदी मीडिया यह सच्चाई बता ही नहीं सकता। क्योंकि बीजेपी हारी है तो अपने घमंड की वजह से हारी है।
वफादारी का इनाम!
भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को वफादारी का इनाम मिल गया है। सरकार का तलवा चाटने पर राजीव कुमार को एचडीएफसी बैंक का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अब आप समझिए कि सभी ब्यूरोक्रेट चुनाव आयुक्त बनने के लिए क्यों बेकरार रहते हैं। क्योंकि चुनाव आयुक्त बनकर वफादारी साबित करना बहुत आसान है। सरकार को नाराज नहीं करने का हुनर दिखाइए और रिटायरमेंट के बाद फायदा लीजिए। याद कीजिए एक बार आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि जितने ब्यूरोक्रेट हैं उन्हें रिटायरमेंट के बाद नौकरी चाहिए। राजीव कुमार को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने चुनाव आयोग का जितना कबाड़ा किया, लगता नहीं है कि भारत के इतिहास में किसी ने किया होगा। खैर, बैंक को उम्मीद है कि राजीव कुमार की एक्सपर्टी से एचडीएफसी बैंक को नई मजबूती मिलेगी, लेकिन चिंता इस बात की है कि कहीं एचडीएफसी बैंक का हाल भी चुनाव आयोग जैसा न हो जाए। अब सोचिए भारत का चुनाव आयुक्त रिटायरमेंट के बाद भी रोजगार पा सकता है, लेकिन देश का युवा कॉकरोच बनकर सड़कों पर आंदोलन करेगा। नौकरी मांगने पर पुलिस की लाठियां खाएगा, लेकिन मोदी सरकार को क्या। अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता।

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