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खतरनाक छत के नीचे हजारों जिंदगियां!

-१,९४१ इमारतों के सर्वे में ७४ बेहद जर्जर मिलीं
-लेकिन बेघर होने वालों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं

राधेश्याम सिंह / विरार

भिवंडी में हाल ही में हुए इमारत हादसे के बाद वसई-विरार शहर महानगरपालिका ने शहर की जर्जर इमारतों का सर्वे करना तेज कर दिया है। महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त दीपक सावंत ने बताया कि महाराष्ट्र शासन के वर्ष २०१५ के परिपत्र के अनुसार वर्ष २०२६-२७ के लिए शहर की कुल १,९४१ इमारतों का संरचनात्मक सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। मनपा के अधिकारी दीपक सावंत ने बताया कि सर्वेक्षण में ७४ इमारतें सी-१ श्रेणी में पाई गई हैं, जिन्हें अत्यंत खतरनाक घोषित किया गया है। इन इमारतों में रहना सुरक्षित नहीं है और इन्हें खाली कराकर ध्वस्त किया जाना आवश्यक है। वहीं ६४० इमारतें सी-२ए श्रेणी में हैं, जिन्हें पहले खाली कर मरम्मत करानी होगी और अधिकृत प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही उनमें दोबारा निवास किया जा सकेगा। इसके अलावा १,१६८ इमारतें सी-२बी श्रेणी में हैं, जिनकी मरम्मत इमारत में रहते हुए भी कराई जा सकती है। वहीं ५९ इमारतें सी-३ श्रेणी में हैं, जिन्हें केवल सामान्य मरम्मत की आवश्यकता है। अतिरिक्त आयुक्त ने बताया कि सी-१ श्रेणी की सभी इमारतों को खाली कराने के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं। जुलाई में हुई भारी बारिश के बाद १६ जुलाई को महानगरपालिका आयुक्त की अध्यक्षता में विशेष बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में जोन-२ और जोन-३ के डीसीपी, एसीपी, संबंधित पुलिस थाना प्रभारी तथा महावितरण के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सी-१ श्रेणी की इमारतों को तत्काल खाली कराने की रणनीति पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अब तक ३४ खतरनाक इमारतें खाली कराई जा चुकी हैं, जबकि १९ इमारतों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन दिनों में इन इमारतों को पूरी तरह तोड़ दिया जाएगा। दीपक सावंत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने खतरनाक इमारतें खाली की हैं, उनके पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था महानगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं है। महानगरपालिका ने केवल नोटिस देकर निवासियों को इमारतें खाली करने के निर्देश दिए हैं, जिनका उन्होंने पालन किया है।
७४ इमारतों में मौत का खतरा, पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं
वसई-विरार मनपा ने ७४ इमारतों को अत्यंत खतरनाक घोषित कर खाली कराने के आदेश दिए हैं। अब तक ३४ इमारतें खाली कराई जा चुकी हैं और १९ को गिराने की कार्रवाई जारी है। मनपा ने स्पष्ट किया कि विस्थापितों के पुनर्वास की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

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