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सीधी बात : अंधाधुंध शहरीकरण का साइड इफेक्ट… ठाणे-घोडबंदर सड़क दुर्घटना में हिरण की दर्दनाक मौत

सुरेश गोलानी

ठाणे-घोडबंदर मार्ग पर सड़क पार करते समय सोमवार देर रात तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपत में आने से एक हिरण की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने फिर एक बार वन्यजीवों की सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण को लेकर चिंता को बढ़ा दिया है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (एसजीएनपी) से सटे इन मार्गों पर (वन्यजीव) जंगली जानवरों की आवाजाही हमेशा बनी रहती है। विशेष रूप से तेंदुए, हिरण, बंदर और अन्य वन्यजीव अक्सर पानी और भोजन की तलाश में सड़क पार करते हुए देखे जाते हैं। सोमवार रात को एक हिरण सड़क पार कर रहा था, तभी एक तेज रफ्तार भारी वाहन ने उसे टक्कर मार दी। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, टक्कर के बाद हिरण कुछ दूर जाकर गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। कुछ चालकों ने अपने वाहन रोककर हिरण की मदद करने की कोशिश की। हालांकि, गंभीर चोटों के कारण कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। एक वाहन चालक ने इस घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन के वैâमरे में वैâद कर लिया, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वन्यजीवों की सड़क दुर्घटना में मौत का यह पहला मामला नहीं है, कई जानवर तेज रफ्तार वाहनों के चपेट में आने से अपनी जान गवां चुके हैं। वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार हिरण की मौत महज एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही, खराब सड़क प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों की मानव एवं वन्यजीव दोनों की सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने में निरंतर विफलता का परिणाम है। हिरण की मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच और संबंधित विभाग के अधिकारियों की पहचान कर उन पर उत्तरदायित्व निर्धारित करने की मांग करते हुए गो ग्रीन फाउंडेशन ट्रस्ट से जुड़े पर्यावरण कार्यकर्ता सैयद मोहम्मद साबिर उस्मान ने मीरा-भायंदर महानगरपालिका आयुक्त, वन संरक्षक, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान निदेशक, लोक निर्माण एवं परिवहन मंत्रियों को पत्र लिखकर वन्यजीव क्रॉसिंग, चेतावनी प्रणाली, गति नियंत्रण उपाय, उचित प्रकाश व्यवस्था, अंडरपास या फेंसिंग लगाने, सड़कों की मरम्मत और निरंतर निगरानी जैसी उचित व्यवस्थाओं के अभाव की तरफ ध्यान आकर्षित करवाया है।
अंधाधुंध शहरीकरण का दुष्परिणाम
एसजीएनपी जैसे वन क्षेत्र से घिरा मीरा रोड-काशीमीरा और घोड़बंदर इलाका सत्ता में बैठे धनवान नेता, मंत्री और बिजनेस समूहों के लिए पर्यटन की आड़ में व्यावसायिक दुरुपयोग के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। फाइव स्टार होटल, क्लब और कॉलेज हो या वाइल्ड लाइफ रिजॉर्ट- इन सभी का निर्माण मैंग्रोव्ज बाधित जमीनों पर और इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए या तो हो चुका है फिर धड़ल्ले से हो रहा है। इसके आलावा सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन करते हुए इन संरक्षित क्षेत्रों के आसपास बड़े निर्माण और प्रतिबंधित गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होती है और वन्यजीवों के आवास पर खतरा मंडराता है। संरक्षित क्षेत्रों के आसपास इंसानों द्वारा अतिक्रमण किए जाने से वन्य जीव मजबूर होकर अपना प्राकृतिक आवास छोड़कर आबादी की और रुख कर रहे हैं।

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