-बोले- कोई भी हो, हम उसे यहां घुसने नहीं देंगे
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की सरकार सहकारी संपत्तियों को बेचने के मामले में काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पहले भी कई चीनी मिल बेच चुकी है अब सोलापुर जिले में बंद पड़े आदिनाथ सहकारी चीनी मिल को बेचने की साजिश शुरू हो गई है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। कारखाने की अनुमानित कीमत करीब ४५० से ५०० करोड़ रुपये होने का दावा करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक और कारखाने के अध्यक्ष नारायण आबा पाटील ने आरोप लगाया है कि इसे महज १२० करोड़ रुपये में नीलाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक ‘अदृश्य शक्ति’ के सक्रिय होने का आरोप लगाते हुए सरकार पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
नारायण पाटील का आरोप है कि आदिनाथ सहकारी चीनी मिल पिछले कई वर्षों से बंद है। कारखाने के पास मौजूद जमीन और उसका रणनीतिक स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में कारखाने को आर्थिक मदद देकर दोबारा शुरू करने के बजाय उसे नीलामी के जरिए बेचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि करीब ५०० करोड़ रुपये की संपत्ति वाले इस कारखाने को केवल १२० करोड़ रुपये में बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
कौन है ‘अदृश्य शक्ति’?
विधायक पाटील ने आरोप लगाया कि कारखाने को ओंकार शुगर के बाबूराव बोत्रे को सौंपने की दिशा में गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कौन-सी ‘अदृश्य शक्ति’ काम कर रही है, यह गंभीर जांच का विषय है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति और भाजपा नेता राम शिंदे की ओर है, तो उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब राम शिंदे से ही पूछा जाना चाहिए।
किसी भी कीमत पर चीनी मिल को बेचने नहीं दिया जाएगा
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक नारायण पाटील ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर आदिनाथ सहकारी चीनी मिल को बेचने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कारखाने के करीब ३२ हजार सदस्य और करमाला की जनता इस कथित बिक्री का विरोध करेगी। उनका दावा है कि नीलामी के जरिए कारखाना खरीदने वाला कोई भी व्यक्ति यहां कदम नहीं रख पाएगा।
पाटील ने यह भी कहा कि कारखाने को आर्थिक संकट से बाहर निकालने और उसे दोबारा शुरू करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री से सहयोग की पहल की थी, लेकिन अपेक्षित आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। अब कारखाने की नीलामी की खबर सामने आने के बाद शरद पवार गुट और कारखाने के सदस्य आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में हैं।
नीलामी को लेकर गंभीर सवाल
महाराष्ट्र में जरंडेश्वर, जालना, राम गणेश गडकरी और कन्नड जैसी चीनी मिलों की संपत्तियों की नीलामी को लेकर विपक्षी दलों ने समय-समय पर गंभीर सवाल उठाए हैं। धाराशिव जिले की तेरणा शेतकरी सहकारी चीनी मिल का मामला भी ऐसा ही गंभीर मामला था। कर्ज का हवाला देकर इस चीनी मिल की करीब ९३ एकड़ जमीन बेचने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। जरंडेश्वर से तेरणा तक के मामलों में एक बात समान दिखाई देती है। यहां कई चीनी मिलों की आर्थिक बदहाली का हवाला देकर निजी संस्थानों को कौड़ियों के भाव बेचने की साजिश यह सरकार कर रही है।
नीलामी
जरंडेश्वर सहकारी चीनी मिल, पुणे को गुरु कमोडिटी सर्विसेज प्रा. लि. ने लिया
कन्नड सहकारी चीनी मिल, छत्रपति संभाजीनगर की नीलामी हुई।
राम गणेश गडकरी सहकारी चीनी मिल की नीलामी हुई, यह निजी खरीदार से जुड़ा मामला।
जालना सहकारी चीनी मिल, जालना
तेरणा शेतकरी सहकारी चीनी मिल, धाराशिव
स्वामी समर्थ सहकारी चीनी मिल, सोलापुर।
