मुख्यपृष्ठस्तंभएपस्टीन फाइल्स का जिन्न फिर बाहर!

एपस्टीन फाइल्स का जिन्न फिर बाहर!

न इल्लंग के भले हैं न उल्लंग के

ई राज

रील वारे हू कैसी-कैसी रील बनाय मारें। अब तौ सहर वारे हू ऐसी रील’न कों देख कें चौंकें नांय नें। एकदम नॉर्मल सौ लगन लग्यौ है सब कछ। वैसें रील होंय या राजनीती के चोचले, दौनों’न की गत एक जैसी है। सबको सब कुछ पता है फिर भी सब के सब टकटकी बांधे तमाशा देखे जा रहे हैं। वैसें हू भैया अपने यहां तौ अगर कहूं बुलडोजर हू दिख जावै तौ मेला लग जावै है। सत्तापक्ष वारे कहें विपक्ष अपना धर्म भूल गया है और विपक्ष वारे कहें सत्तापक्ष अपना धर्म भूल गया है। चलौ एक जगें तौ ये दौनों धर्म शब्द कौ सही इस्तेमाल करें हैं। कम सों कम यहां तौ ये दौनों धर्म के मर्म कों समझते भए बात करें है। अन्यथा भैया धर्म शब्द की ऐसी दुर्गत है रखी है कि पूछौ ही मत। अजीब समय है, सबकों, सबसों सिकायत है। खासकर चौरे में वैâमरा के सामनें तौ जूतमपैजार और वैâमरा हटते ही ‘जहां चार यार मिल जाएं वहीं रात को गुजार’। अजीब किसम कौ विरोध है। पब्लिक हू कम नांय नें। भलीभांति पतौ है कि न इल्लंग के भले हैं, न उल्लंग के; तौ हू न्यूज ऐसें देखै मानों कोऊ बिसेस समाचार आय रहे होंय। हम हू बात कहां सों कहां लै आये। कन्फ्यूजन यत्र-तत्र-सर्वत्र है। बात हुती रील’न की। एक रील अक्सर मोबाइल’न पै नाचौ करै है कि एक बाइक पै पांच छह आदमी बैठे भये हैं। आगें सफेद कमीज वारे, बीच में सफारी वारे और पीछें खाकी वर्दी में पुलिस वारौ। भैया या में बिसेस का है। आप हमारे कहवे सों एकबार कल्पना कर कें देखौ तौ सही; आप कों हू लगैगौ कि वौ बाइक जो है नें वौ बाइक नांय नें। वौ निरीह जनता है और वा पै बैठे भए सफेद कमीज वारे नेता हैं। सफारी वारे बिजनिस मैन और अफसर लोग हैं। खाकी वारे कों तौ आप समझ ही सकौ। अब आप ही बताऔ या में अचम्भे जैसी का बात है। निरीह जनता इन सब कों ढोय रही है कि नांय?
हैं शिकार अब भी वही, जिनका नहीं कुसूर
गौतम भी मजबूर थे, हम भी हैं मजबूर

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