मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु: क्या आपकी बचत सिर्फ कर्ज चुकाती है?

निवेश गुरु: क्या आपकी बचत सिर्फ कर्ज चुकाती है?

भरतकुमार सोलंकी / मुंबई

पिछले सप्ताह प्रकाशित लेख ‘क्या आप कमा रहे हैं या पूरी जिंदगी बीसी के सहारे चल रहे हैं?’ पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं। अनेक व्यापारियों का कहना था कि बीसी (कमेटी/चिट फंड) व्यापार की कार्यशील पूंजी का एक साधन है और इससे व्यवसाय चलता है। यह तर्क अपनी जगह सही हो सकता है। लेकिन मेरा सवाल बीसी से नहीं, बल्कि उस मानसिकता से है, जिसमें व्यक्ति पूरी जिंदगी केवल देनदारियां पूरी करने में लगा रहता है।
जरा स्वयं से पूछिए। यदि आपने २०–२५ वर्षों तक जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम भरा, म्यूचुअल फंड में एसआईपी की, पीपीएफ में बचत की या शेयरों में निवेश किया और मैच्योरिटी के दिन पूरी राशि बैंक का लोन, व्यापार का कर्ज या पुराने उधार चुकाने में चली गई, तो क्या आपने वास्तव में संपत्ति बनाई? या केवल एक २० साल की लंबी बीसी पूरी की?
क्या निवेश का उद्देश्य केवल एकमुश्त रकम इकट्ठी करना है? या ऐसी पूंजी बनाना है जो भविष्य में आपके लिए आय पैदा करे? यदि मैच्योरिटी के बाद आपके पास फिर शून्य बचत रह जाती है, तो रिटायरमेंट वैâसे सुरक्षित होगा? और अगली पीढ़ी को आप संपत्ति देंगे या केवल संघर्ष की कहानी?
एक और सवाल। क्या आपने कभी अपनी वित्तीय योजना बनाते समय यह तय किया कि कौन-सा कर्ज आवश्यक है और कौन-सा अनावश्यक? क्या आपने बच्चों की शादी, बड़ा मकान, दिखावा या सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए अपनी दीर्घकालीन बचत को बीच-बीच में तोड़कर भविष्य को कमजोर नहीं किया? यदि हर मैच्योरिटी केवल पुरानी देनदारी चुकाने में ही चली जाएगी, तो आर्थिक स्वतंत्रता आखिर कब आएगी? वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश का वास्तविक उद्देश्य केवल धन जमा करना नहीं, बल्कि ऐसी परिसंपत्तियां बनाना है, जो समय के साथ आपकी आय बढ़ाएं। यदि आपकी हर बचत केवल कर्ज चुकाने में समाप्त हो जाती है, तो समस्या निवेश की नहीं, बल्कि वित्तीय योजना की है।
याद रखिए, सफल निवेशक वह नहीं जिसकी पॉलिसी मैच्योर हो गई या जिसने करोड़ों का पोर्टफोलियो बना लिया। सफल निवेशक वह है, जिसकी मूल पूंजी सुरक्षित रहे, उससे नियमित आय बने और आवश्यकता पड़ने पर भी उसे अपनी पूरी जमा पूंजी समाप्त न करनी पड़े। इसलिए अगली बार जब आप कोई एसआईपी, बीमा पॉलिसी या दीर्घकालीन निवेश शुरू करें, तो स्वयं से एक सवाल अवश्य पूछिए-क्या मैं भविष्य के लिए संपत्ति बना रहा हूं, या केवल भविष्य में चुकाए जाने वाले कर्ज की व्यवस्था कर रहा हूं?
क्योंकि वेल्थ क्रिएशन का अर्थ केवल बचत करना नहीं, बल्कि ऐसी आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करना है जहां आपकी बचत आपकी सेवक बने, मालिक नहीं।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं।)

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