हो प्रभात की नई बेला
या सूर्यास्त की शाम,
ऐ मेरे प्यारे देश, तुझे
शत-शत मेरा प्रणाम।
तेरे आंचल की छांव तले
संवरा मेरा बचपन-यौवन,
तेरी माटी की खुशबू से
महका मेरा प्यारा जीवन।
मेरा मन और मेरा तन
सर्वत्र है तेरे नाम।
ऐ मेरे प्यारे देश, तुझे
शत-शत मेरा प्रणाम।
न नजर लगे दुनिया की तुझे,
न दुश्मन आंखें चार करे।
ऐसे ही आगे ही बढ़ता रहे,
सारा ये जग तुझे प्यार करे।
है सिर्फ नहीं, है वतन मेरा,
है सबका पावन धाम।
ऐ मेरे देश, तुझे
शत-शत मेरा प्रणाम।
-पूरन ठाकुर जबलपुरी
कल्याण ईस्ट
