राजेश सरकार / प्रयागराज
स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के मंच पर जब महारानी अहिल्याबाई होलकर का न्याय, साहस और नेतृत्व जीवंत हुआ और महारानी लक्ष्मीबाई की तलवार ने अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा, तो पूरा प्रेक्षागृह इतिहास के गौरवशाली पलों में डूब गया। बाल कलाकारों के दमदार संवाद, भावपूर्ण अभिनय और प्रभावशाली मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। देशभक्ति से ओत-प्रोत दृश्यों पर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से प्रेक्षागृह गूंज उठा। तालियों की गड़गड़ाहट ने बाल कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज एवं संस्कृति मंत्रालय की ओर से ‘शिक्षा में रंगमंच’ के अंतर्गत आयोजित ‘बाल रंग उत्सव’ के दूसरे दिन बुधवार को एनसीजेडसीसी प्रेक्षागृह में इतिहास की दो वीरांगनाओं-महारानी अहिल्याबाई होलकर और महारानी लक्ष्मीबाई-के जीवन पर आधारित नाटकों का शानदार मंचन हुआ।
अहिल्याबाई में दिखी न्याय और नारी शक्ति की तस्वीर
उमेश भाटिया के निर्देशन में ‘अहिल्याबाई’ नाटक का मंचन निवेदिता शिक्षा सदन, वाराणसी के बाल कलाकारों ने किया। कलाकारों ने अहिल्याबाई होलकर को कुशल शासिका के साथ न्याय, संवेदना, नेतृत्व और नारी शक्ति की सशक्त प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
अहिल्याबाई के जीवन संघर्ष, प्रशासनिक दक्षता, लोककल्याण की भावना और दृढ़ निर्णयों को कलाकारों ने मंच पर प्रभावी ढंग से जीवंत किया। नाटक में भारतीय दर्शन और जीवन-मूल्यों का भी सुंदर समावेश रहा। प्रस्तुति ने संदेश दिया कि नारी केवल इतिहास की साक्षी नहीं, बल्कि इतिहास की दिशा बदलने वाली शक्ति भी है।
लक्ष्मीबाई की हुंकार से थर्राया मंच
इसके बाद डॉ. हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन में ‘महारानी लक्ष्मीबाई’ नाटक का मंचन हुआ। प्रस्तुति ने दर्शकों को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौर में पहुंचा दिया। नाटक कक्षा छह के पाठ्यक्रम में शामिल सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता ‘झांसी की रानी’ तथा कक्षा सात के पाठ्यक्रम में शामिल ‘नींव का पत्थर’ नाटक से प्रेरित था।
मंच पर अंग्रेजों की झांसी पर कब्जे की साजिश और रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रानी का स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा का संकल्प अडिग रहा। जूही और मुंदर ने रानी का मनोबल बढ़ाया, जबकि रघुनाथ राव ने सेनापति के रूप में युद्ध की रणनीति संभाली। तात्या टोपे ने स्वतंत्रता संग्राम में रानी का साथ दिया और रामचंद्र ने निष्ठा एवं वीरता का परिचय दिया। अंग्रेजी सत्ता के प्रतिनिधि गोरा के माध्यम से अंग्रेजों की रणनीति और षड्यंत्रों को सामने रखा गया।
युद्ध, संघर्ष, विश्वासघात और विपरीत परिस्थितियों के बीच लक्ष्मीबाई के अंतिम क्षण तक संघर्ष को देखकर दर्शक भावुक हो उठे। मातृभूमि के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान के दृश्य ने प्रेक्षागृह को देशभक्ति के जज्बे से भर दिया। बाल कलाकारों की प्रस्तुति पर देर तक तालियां गूंजती रहीं।
