मुख्यपृष्ठनए समाचाररायबरेली में पुलिस के एनकाउंटर के डर से युवक ने दी जान!

रायबरेली में पुलिस के एनकाउंटर के डर से युवक ने दी जान!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

पुलिस के एनकाउंटर की धमकी से आहत राजू (28) ने मंगलवार रात फंदे से लटककर जान दे दी। बुधवार सुबह जब घटना की जानकारी मिली तो परिजन आक्रोशित हो गए। पुलिस मौके पर पहुंची तो परिजनों के साथ नोक-झोंक हुई। परिजनों ने हंगामा किया और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि गैर इरादतन हत्या के मामले में पुलिस मृतक युवक के बहनोई को सरेंडर कराने का दबाव बना रही थी। कई थानों की पुलिस के अलावा एएसपी मौके पर पहुंच कर परिजनों से बातचीत की। एएसपी ने मामले में उचित कार्रवाई कराने का भरोसा देकर परिजनों को शांत कराया। पीड़ित परिवार ने एक दरोगा व सिपाही के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीकरगढ़ गांव निवासी राजू एनटीपीसी परियोजना में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। मंगलवार रात खाना खाने के बाद राजू अपने कमरे में सो गए थे। सुबह देर तक राजू कमरे से बाहर नहीं आए तो परिजनों की चिंता हुई। परिजनों ने खिड़की से झांका तो देखा कि पंखे के हुक से साड़ी के सहारे राजू का शव लटक रहा था। दरवाजा तोड़कर परिजन कमरे के अंदर गए और शव को नीचे उतारा।उसके बाद शव को पुलिस के कब्जे में देने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने समझाने का प्रयास किया तो परिजन व ग्रामीण हंगामा करने लगे। विवाद बढ़ने पर ऊंचाहार के अलावा जगतपुर, ऊंचाहार, गदागंज, डलमऊ व महराजगंज कोतवाली पुलिस के साथ एएसपी आलोक सिंह मौके पर पहुंचे।
इस दौरान पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी मिथलेश कुमारी की शादी नेरुवापुर गांव में हुई है। बेटी की ननद के ससुर रामदीन की मौत के मामले में बीती जुलाई माह उनके दामाद समेत अन्य लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले में उनके दामाद का कोर्ट में सरेंडर कराने के लिए पुलिस उनके बेटे राजू पर दबाव बना रही थी। ऐसा नहीं होने पर पुलिस ने एनकाउंटर की धमकी दी थी। इसी वजह से उनके बेटे ने खुदकुशी कर ली है। घटना के लिए ऊंचाहार कोतवाली में तैनात एक दरोगा व सिपाही जिम्मेदार है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस 10 दिन पहले उनको बेटे को उठाकर ले गई और पिटाई की। बाद में 10 हजार रुपये लेकर बेटे को छोड़ा था। एएसपी ने मामले की जांच कराने व जांच में दोषी पाये जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।
इस संबंध में सीओ गिरिजाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि उसके रिश्तेदार फरार चल रहे हैं। राजू ने उनको हाजिर कराने की बात कही थी। इसलिए पुलिस ने उन्हें पूछताछ की थी। मारपीट या धमकाने का आरोप गलत है। श्याम कुमार, सोनू, मोनू ,सुरेश, पुत्ती व दो बहनों ऊषा व मिथलेश में मृतक राजू सबसे छोटा था। मई माह में ही उनकी शादी हुई थी। घटना के समय उनकी पत्नी अंजली अपने मायके में थीं। जब आयी तो लोगों ने कहा कि “अभी हाथ की मेंहदी भी नहीं छूंटी और मांग का सिंदूर उजड़ गया”।
उनकी मां विपाता बेहोश हो गई। होश में आईं तो पुलिस वालों को कोसने लगीं, कहा मेरा बेटा बेकसूर था, फिर भी पुलिस ने एक बात नहीं मानी और बेटे को जान देने पर मजबूर कर दिया। वहीं पिता माताबदल भी बेटे के असमय जाने से गमजदा हैं। उनकी आंखों से आंसू नहीं थम रहे हैं। घटना की जानकारी मिलने पर सपा जिलाध्यक्ष इं वीरेंद्र यादव और सपा नेता मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से घटना के बारे में जानकारी ली। साथ ही परिजनों को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।”

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