संतोषी रावत
ब्रिटिश रॉयल नेवी और स्पेशल फोर्सेस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अत्याधुनिक समुद्री ड्रोन व्रैâकेन ख्३ स्काउट को लेकर एक बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा विवाद सामने आया है। इस मानवरहित समुद्री पोत को फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने की योजनाबद्ध तैनाती के लिए तैयार किया जा रहा था। हालांकि, एक नियमित साइबर सुरक्षा जांच के दौरान पता चला है कि इन ड्रोनों में लगे वैâमरों से चीन स्थित एक आईपी पते पर गुप्त रूप से डेटा भेजा जा रहा था।
डेटा ट्रांसमिशन और सुरक्षा में चूक
रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटिश रक्षा ठेकेदार व्रैâकेन टेक्नोलॉजी ग्रुप द्वारा निर्मित इस १.२ करोड़ पाउंड के ड्रोन बेड़े में एक थर्ड-पार्टी आपूर्तिकर्ता से खरीदे गए वैâमरे लगाए गए थे। इन वैâमरों के भीतर चीनी निर्मित पुर्जे मौजूद थे, जो चीन के एक सर्वर को ‘हार्टबैट कम्युनिकेशंस’ भेज रहे थे। यह डेटा डिवाइस के ऑनलाइन होने और सामान्य रूप से काम करने का संकेत देने वाले सिस्टम सिग्नल होते हैं।
चिंता की बात यह है कि इन ड्रोनों का परीक्षण और संचालन ब्रिटिश रॉयल मरीन की विशेष सैन्य इकाई ४७ कमांडो और स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) के मुख्यालय, डॉर्सेट के करीब किया जा रहा था। आशंका जताई गई कि वैâमरे बंद होने के बाद भी यह प्रणाली सक्रिय रह सकती थी, जिससे संवेदनशील बैठकों और विशेष सैन्य बलों की गतिविधियों पर जासूसी का जोखिम उत्पन्न हो गया।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रभाव
रक्षा मंत्रालय का कदम: यूके रक्षा मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए वैâमरों से इंटरनेट कनेक्टिविटी तुरंत हटा दी है।
मंत्रालय की सफाई: साइबर जांच में यह पाया गया कि किसी भी संवेदनशील या वर्गीकृत रक्षा डेटा का बाहर स्थानांतरण नहीं हुआ है।
भविष्य के अभियानों पर असर: इस खुलासे ने सैन्य आपूर्ति शृंखला में घटकों की मूल उत्पत्ति की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रस्तावित अभियानों की योजना और प्लेटफॉर्म पर भरोसा प्रभावित हुआ है।
