मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का :  किचन में ताक-झांक... महंगी प्लेट, कितनी परफेक्ट?

तड़का :  किचन में ताक-झांक… महंगी प्लेट, कितनी परफेक्ट?

कविता श्रीवास्तव

शहरों में बाहर खाना अब सिर्फ पेट भरने का मामला नहीं है। यह लाइफस्टाइल है, सोशल स्टेटस है और कई लोगों के लिए तो वीकेंड का सबसे बड़ा प्लान भी! खासकर, शनिवार की शाम आलीशान रेस्टोरेंट, इंस्टाग्रामेबल इंटीरियर, हल्की रोशनी, महंगे मेन्यू और प्लेट में सजा हुआ खाना…सब कुछ परफेक्ट। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि जो किचन दिखाई नहीं देता, वह कितना परफेक्ट है? इस पर हम कभी विचार ही नहीं करते! आखिर रेप्युटेड रेस्टोरेंट की टेबल जो है! खाद्य और औषधि प्रशासन यानी एफडीए की कार्रवाई ने हमारे भरोसे के इसी पर्दे को खोल दिया है और हमारी आंखों को भी। एक सर्वे ने लोगों की प्रतिक्रियाएं लीं, जिसमें अब लोगों में बाहरी चमक और अंदर की अनियमितता दोनों की चिंता है। हालांकि, अभी भी कई लोग एयर-कंडीशंड रेस्टोरेंट्स की हाइजीन और फूड को `अच्छा’ या `बेहतरीन’ मानते हैं। लेकिन भरोसे की इस प्लेट के नीचे चिंता की एक और परत है। ७० प्रतिशत मुंबईकरों को गंदे किचन, डाइनिंग एरिया और वॉशरूम की चिंता है। ६९ प्रतिशत लोगों को कुकिंग ऑयल के बार-बार इस्तेमाल पर शक है। ६७ प्रतिशत को कॉकरोच, चूहे और मक्खियां परेशान करती हैं और ६६ प्रतिशत को डर है कि कहीं प्लेट में ताजा खाना बताकर बासी खाना तो नहीं परोसा जा रहा। मतलब साफ है कि प्लेट देखकर भरोसा मत कीजिए, किचन भी देखना पड़ेगा! हम सड़क किनारे मिलने वाले खाने को लेकर बड़ी आसानी से पैâसला सुनाते हैं कि बाहर का खाना है तो हाइजीन नहीं होगी, लेकिन क्या सिर्फ सड़क वाला खाना ही संदिग्ध है? कई बार हम चमचमाते रेस्टोरेंट में बैठकर हजारों का बिल चुकाते हैं और मान लेते हैं कि महंगा मतलब सुरक्षित। एयर-कंडीशनर चल रहा है, सोफा साफ है, टेबल चमक रही है, वेटर यूनिफॉर्म में है तो किचन भी स्वच्छ होगा। जैसी चमचमाहट बाहर है, भीतर किचन भी वैसा ही होगा! पर कभी वहां हम झांकते भी नहीं। यही हमारी सबसे बड़ी गलतफहमी हो सकती है। एफडीए की कार्रवाइयों ने इसी भ्रम पर जोरदार ब्रेक लगाया है। अब सवाल उठा है कि जिस जगह हम परिवार के साथ खाना खाते हैं, वहां पर्दे के पीछे आखिर सच क्या है? लोगों ने हाइजीन उल्लंघन पर लाइसेंस तुरंत सस्पेंड करने को सही ठहराया है। नियम तोड़ने वाले रेस्टोरेंट्स के नाम भी लोग जानना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि फूड डिलिवरी ऐप पर हाइजीन रेटिंग दिखाई जाए और गलती पर जुर्माना लगे। हाइजीन सिर्फ रेस्टोरेंट के आकर्षक बोर्ड पर न झलके। ग्राहक को यह भी मालूम हो कि उसकी प्लेट तक पहुंचने वाला खाना किस माहौल में तैयार हुआ है। सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं है, यह स्वास्थ्य पर असर डालता है। हम मंहगा बिल भरते हैं और सेहत की कीमत भी हमें ही चुकानी पड़ती है। अगली बार किसी रेस्टोरेंट में बैठकर महंगे खाने की फोटो खींचने से पहले एक नजर किचन पर भी घुमाइए, क्योंकि चमकती प्लेट जरूरी है और किचन की सच्चाई जानना भी।

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