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घाटकोपर-कुर्ला भूस्खलन मामला…नोटिस चिपकाकर सो रही मनपा!.. ७ लोगों की मौत हो गई, जिम्मेदार कौन?

-मानसून से पहले खतरनाक बताकर भी प्रशासन ने नहीं लिया फॉलोअप

द्रुप्ति झा / मुंबई

घाटकोपर-कुर्ला इलाके में भूस्खलन ने मनपा की तैयारियों और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानसून से पहले पहाड़ी इलाकों को खतरनाक घोषित कर प्रशासन ने चेतावनी तो जारी की, लेकिन आरोप है कि उसके बाद कोई ठोस फॉलोअप नहीं हुआ। हादसे में ७ लोगों की मौत के बाद स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। अब सवाल सीधा है। इन मौतों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
बता दें कि मुंबई के घाटकोपर पश्चिम इलाके में बुधवार तड़के ३ बजे बड़ा हादसा हो गया। नवाज चॉल में लोग सो रहे थे, तभी अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा झोपड़ियों पर गिर गया। भूस्खलन की चपेट में करीब ६-७ झोपड़ियां आ गर्इं। इस हादसे में ७ लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में ७ लोगों के घायल होने की बात भी सामने आई।
-खतरे का अलर्ट था, लेकिन पुनर्वास नहीं!
-हादसे के बाद प्रशासन पर उठे सवाल
भूस्खलन की आशंका को लेकर मानसून से पहले चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन प्रभावित लोगों के सुरक्षित पुनर्वास का ठोस इंतजाम नहीं हुआ। अब हादसे के बाद प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिर्फ नोटिस देकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई, जबकि खतरा पहले से सामने था।
खतरा पहले से था, फिर भी नहीं बची जानें!
मानसून की शुरुआत से पहले ही इस इलाके में भूस्खलन होने की आशंका जताई जा रही थी। आरोप है कि मनपा और प्रशासन ने खतरनाक क्षेत्र घोषित कर सिर्फ नोटिस चिपकाए और अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। अगर समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता, तो इतने बेकसूरों की जान बचाई जा सकती थी।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। संकरी गलियों और पहाड़ी इलाके के कारण भारी मशीनरी को घटनास्थल तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। बता दें कि मानसून से पहले सिविक एडमिनिस्ट्रेशन ने एस वार्ड के विक्रोली और भांडुप के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले एवं झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों से अपील की थी कि वे मानसून के मौसम से पहले सावधानी के तौर पर सुरक्षित जगहों पर चले जाएं। प्रशासन ने विक्रोली-वेस्ट के सूर्यनगर, पवई में इंदिरानगर, गौतम नगर, पासपोली, जयभीम नगर, भांडुप-वेस्ट में रमाबाई आंबेडकर नगर पार्ट-१ और २, नरदास नगर, गांवदेवी टेकड़ी, गांवदेवी रोड, टेंभीपाड़ा, रावते कंपाउंड, खिंडीपाड़ा, रामनगर, हनुमान नगर, हनुमान टेकड़ी, अशोक टेकड़ी और अंब्याची भरानी समेत पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले लोगों के लिए चेतावनी जारी की कि नालों के ओवरफ्लो होने की भी संभावना है, जिससे झोपड़ियां बह सकती हैं।
प्रतीक्षा नगर में एक मंजिला इमारत गिरी
मुंबई के प्रतीक्षा नगर इलाके में बुधवार को शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। माला गार्डन, टी/१८ बिल्डिंग के सामने स्थित एक ग्राउंड फ्लोर की संरचना अचानक गिर गई। जिसकी सूचना फायर ब्रिगेड को शाम १६:४८ बजे मिली। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ढही हुई संरचना के मलबे में ३ से ४ लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई। मामले की जांच जारी है।

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