मुख्यपृष्ठस्तंभउड़न छू: अजैविक पुराण कथा

उड़न छू: अजैविक पुराण कथा

अजय भट्टाचार्य
प्राचीन काल में राजा अश्वमेध यज्ञ किया करते थे। एक घोड़ा छोड़ दिया जाता था। वह जहां-जहां निर्बाध घूम आता, वहां-वहां यह घोषणा मानी जाती कि उस भूमि पर अब यज्ञकर्ता राजा का अधिकार है। यदि किसी राजा में साहस होता, तो वह उस घोड़े को रोक लेता। फिर तलवारें बोलतीं, सेनाएं भिड़तीं और इतिहास का नया अध्याय लिखा जाता। वह घोड़ा केवल घोड़ा नहीं था, चलता-फिरता भू सर्वेक्षण अधिकारी था, जो तय करता था कि अगला नक्शा किस रंग से रंगा जाएगा। लेकिन समय बदल गया है। अब न राजा रहे, न अश्वमेध। अब साम्राज्य तलवारों से नहीं, ठेकों, निवेशों और ब्रांंडिंग से बढ़ते हैं।
आज घोड़े की जगह एक नेता छोड़ा जाता है। वह देशों की यात्रा करता है, मंचों पर मुस्कुराता है, मेडल पहनता है, तस्वीरें खिंचवाता है और लौटते समय अपने मालिक के लिए व्यापारिक समझौते, निवेश और परियोजनाएं लेकर आता है। इस आधुनिक अनुष्ठान का नाम है अजैविक अवतार भ्रमण यज्ञ। इस अजैविक अवतार की कृपा राष्ट्रीय सेठ ने १२-१३ साल पहले उड़न खटोला यज्ञ के माध्यम से प्राप्त की थी। राष्ट्रीय सेठ के लिए अजैविक अवतार समर्पित भाव से सेवारत है। उसके कान में ब्ल्यूटूथ लगा है, सामने टेलीप्रॉम्टर रहता है और उसके भाषण इतने स्वाभाविक होते हैं कि कई बार अवतार पुरुष स्वयं भी चौंक जाता है कि उसने यह सब कब सोच लिया। लोकतंत्र के वैश्विक विशेषज्ञ उसे लोकतंत्र प्रेमी बताते हैं, जबकि वह लोकतंत्र को उतना ही जानता है जितना भैंस बीन बजाना। अप्रâीका से उसे साहस का तमगा मिला। लैटिन अमेरिका से सनातन समर्थक सम्मान। सेशेल्स में एआई सृजित गलत स्पेलिंग वाले अवॉर्ड से नवाजा गया। इंडोनेशिया में अवॉर्ड देने के पहले उसे उसके शत्रु की प्रशंसा करके सम्मान किया। एक देश में तो कोकाकोला का ढक्कन फीते में लगाकर उसके गले में लटका दिया गया।
लेकिन ब्राजील वाले भी कम अनुभवी नहीं निकले। उन्होंने पहचान लिया कि यह अवतार नहीं, अवतार की खाल में लिपटा हुआ छलिया है। सो उन्होंने उसके गले में मेडल तो डाल दिया, पर मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने से विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया। अजैविक प्राणी की विशेषता यह है कि वह हर मंच पर मुस्कुराता है। हर वैâमरे की दिशा पहचानता है। और हर मेडल को इस तरह पहनता है, जैसे उसे ऑस्कर या नोबेल मिला हो। राष्ट्रीय सेठ का व्यापार दिन दूना, रात चौगुना बढ़ रहा है। जहां-जहां अवतार पुरुष गए वहां-वहां सेठ के व्यापारिक समझौते खिल उठे। कई देशों को भ्रम हो जाता है कि जब प्रतिनिधि इतना चमकदार है, तो मालिक तो अवश्य ही चक्रवर्ती सम्राट होगा। देश की बजाय वह सेठ का ग्लोबल ब्रांड अंबेसडर, पीआरओ और व्यापार विकास अधिकारी है। इतिहास जब राष्ट्रीय सेठ की व्यापारिक सत्ता का लेखा-जोखा लिखेगा, तब उसमें अवतारीलाल और उसके अंधभक्तों के योगदान को स्वर्णाक्षरों में नहीं, गोबर अक्षरों में अवश्य लिखा जाएगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

अन्य समाचार