मुंबई की पहचान देश के तेज रफ्तार जिंदगी वाले शहर के रूप में है। यहां बढ़ती आबादी, सीमित सड़कें और लगातार बढ़ते वाहनों की संख्या ने यातायात और पार्किंग की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मुंबई में कोस्टल रोड, मेट्रो रेल और नए-नए परिवहन प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। एक्वा लाइन मेट्रो भी चल रही है। आने वाले वर्षों में मुंबई में मेट्रो का नेटवर्क और विस्तृत होने वाला है। इसके बावजूद सड़कों पर यातायात लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
निजी वाहनों की संख्या बढ़ रही है। कारों के साथ ई-वाहन, दोपहिया वाहन, डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स से जुड़े वाहन तथा अन्य व्यावसायिक वाहन बड़ी संख्या में सड़कों पर दिखाई देते हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़कों पर सीमित जगह और पार्किंग की कमी यातायात की समस्या को और बढ़ा रही है। कई सड़कों का एक हिस्सा पार्किंग के लिए ही इस्तेमाल होने लगता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखकर बांद्रा पश्चिम के सेंट एंड्रयूज रोड पर ऑड-ईवन पार्किंग व्यवस्था का आदेश हुआ है। यही व्यवस्था मुंबई के दूसरे व्यस्त इलाकों में भी इस्तेमाल करने पर विचार होना चाहिए। ऑड-ईवन व्यवस्था को केवल पार्किंग तक सीमित रखने के बजाय मुंबई में यातायात प्रबंधन की व्यापक नीति का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
दिल्ली में ऑड-ईवन व्यवस्था के जरिए वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने का प्रयोग किया जा चुका है। मुंबई में भी व्यस्त इलाकों, पीक आवर्स और अत्यधिक भीड़ वाले मार्गों पर सीमित अवधि के लिए ऐसा प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त क्षमता, वैकल्पिक मार्ग और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
दुनिया के बड़े शहरों ने यातायात कम करने के लिए कई तरीके अपनाए हैं। कहीं कंजेशन प्राइसिंग के जरिए भीड़ वाले इलाकों में निजी वाहनों के प्रवेश पर शुल्क लगाया जाता है, तो कहीं पार्किंग महंगी करके लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित किया जाता है। कई शहरों में कार-पूलिंग, साइकिल ट्रैक, पैदल मार्ग और बेहतर बस नेटवर्क पर भी जोर दिया गया है।
मुंबई के लिए सबसे पहले बसों, मेट्रो और लोकल ट्रेनों की कनेक्टिविटी मजबूत करनी होगी। पार्किंग को व्यवस्थित करना होगा, अवैध पार्किंग पर सख्ती करनी होगी और डिजिटल पार्किंग सिस्टम को बढ़ावा देना होगा। कार में अकेले सफर करने के बजाय कार-पूलिंग को प्रोत्साहित किया जा सकता है। डिलीवरी और व्यावसायिक वाहनों के लिए अलग समय और मार्ग तय किए जा सकते हैं।
मुंबई में वाहनों की संख्या रोकना संभव नहीं है और न ही यह व्यावहारिक समाधान है। जरूरत इस बात की है कि वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात प्रबंधन भी उतनी ही तेजी से आधुनिक हो। बांद्रा का ऑड-ईवन पार्किंग प्रयोग इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इसके परिणामों का अध्ययन करके ऐसे सफल मॉडल को शहर के अन्य इलाकों में लागू किया जाए, तो मुंबई की सड़कों को अधिक व्यवस्थित, सुगम और यातायात के लिहाज से बेहतर बनाया जा सकता है।
