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जीवन दर्पण: शनि की साढ़ेसाती में शुभ फल के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें

काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद
-डॉ. बालकृष्ण मिश्र
विद्यावारिधि (पी.एच.डी-काशी)

गुरु जी, मैंने इस वर्ष १०वीं पास किया है, आगे का करियर कैसा होगा?
-अथर्व अहिरवार
(जन्म:१० जून २०१०, दोपहर २-२६ मिनट, डोंबिवली)
आपका जन्म गुरुवार के दिन कृत्तिका नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है। आपकी राशि मेष तथा लग्न कन्या है। कन्या लग्न में शनि की स्थिति आपको मेहनती, अनुशासित और धैर्यवान बनाती है। शनि पंचम भाव के स्वामी होने के कारण शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी प्रगति के योग बनते हैं। शनि को गणित का कारक भी माना जाता है, इसलिए गणित में आपकी विशेष रुचि रह सकती है। आगे चलकर विज्ञान तथा आईटी सेक्टर में आपको अच्छी सफलता मिलने की संभावना है। हालांकि, दशम भाव में केतु और चतुर्थ भाव में राहु की स्थिति के कारण शिक्षा एवं करियर में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। करियर को मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले शिक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। राहु-केतु की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। कुंडली में शंखपाल नामक कालसर्प योग तथा मांगलिक योग के प्रभाव भी बताए गए हैं। शनि की साढ़ेसाती से शुभ फल के लिए हनुमान चालीसा का पाठ और हनुमान जी के दर्शन करना शुभ रहेगा। जीवन के विभिन्न पहलुओं एवं भविष्य की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड भी बनवाना चाहिए।
गुरु जी, मेरी राशि क्या है? मेरा भविष्य कैसा रहेगा? क्या मेरी कुंडली में मांगलिक दोष है?
-आर्यन तिवारी
(जन्म : २६ अप्रैल २०१३, दिन:४:५२, स्थान : डोंबिवली)
आर्यन जी, आपका जन्म विशाखा नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है और आपकी राशि तुला है। तुला राशि का प्रतीक तराजू है, इसलिए आप सोच-समझकर निर्णय लेने वाले व्यक्ति हैं। आपका जन्म कन्या लग्न में हुआ है। द्वितीय भाव में चंद्रमा के साथ राहु और उच्च राशि का शनि होने से कभी-कभी मानसिक असमंजस की स्थिति बन सकती है, इसलिए निर्णय लेते समय स्पष्टता बनाए रखना आवश्यक है। आपकी कुंडली में मंगल अष्टम भाव में स्थित होने के कारण मांगलिक योग बन रहा है। सूर्य उच्च राशि में होने से मान-सम्मान और सफलता के अच्छे योग हैं। प्रतिदिन सूर्य को प्रणाम करना शुभ रहेगा।

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