मुख्यपृष्ठस्तंभगपशप कॉलम : महामार्ग पर भी अतिक्रमण!

गपशप कॉलम : महामार्ग पर भी अतिक्रमण!

-सुप्रीम कोर्ट का डंडा… अब बुलडोजर चलेगा या फाइल ही दौड़ेगी?

राजन पारकर

कहते हैं, सड़क जितनी चौड़ी हो, सफर उतना आसान होता है। लेकिन महाराष्ट्र के महामार्गों को देखकर लगता है कि सड़क से ज्यादा उसके किनारों पर कब्जा करने की होड़ मची है। कहीं ढाबा सड़क तक पहुंच गया, कहीं होटल ने पार्विंâग निगल ली, तो कहीं अनधिकृत रास्तों ने सुरक्षा को ही खतरे में डाल दिया। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने भी सख्ती दिखाई है। १० अगस्त २०२६ के परिपत्र में स्थानीय निकायों को महामार्गों से अतिक्रमण हटाने और सुरक्षा नियमों का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल यह है कि वर्षों से खड़े ये निर्माण अचानक पैदा तो नहीं हुए होंगे! जमीन किसी ने देखी होगी, फाइल किसी ने चलाई होगी और अनुमति भी किसी ने दी होगी। अब पुराने लाइसेंस और एनओसी की समीक्षा होगी तो फाइलों की धूल के साथ कई राज भी बाहर आ सकते हैं।
हर जिले में हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स बनेगा और बैठक हर पंद्रह दिन में होगी। बस उम्मीद यही है कि बैठक के बाद कार्रवाई भी हो। वरना वही पुराना दृश्य-चाय, चर्चा, फाइल और अंत में ‘आवश्यक कार्रवाई की जाएगी’!
अतिक्रमण हटना चाहिए, लेकिन बुलडोजर की नजर सिर्फ गरीब की टपरी पर नहीं, बड़े और प्रभावशाली अवैध निर्माणों पर भी पड़नी चाहिए। महामार्ग किसी की निजी जागीर नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश है, सरकारी परिपत्र है और टास्क फोर्स भी बनने वाला है। देखना सिर्फ इतना है– बुलडोजर चलेगा या फिर सरकारी फाइल ही महामार्ग पर सबसे तेज दौड़ेगी?

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