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जीरो फिगर: सुंदरता या स्वास्थ्य जोखिम

डॉ अर्चना द्विवेदी / मुंबई 

फिल्म इंडस्ट्री में “जीरो फिगर” का चलन लंबे समय से चर्चा में रहा है। ग्लैमर की दुनिया में पतला, आकर्षक और फिट दिखना कई बार सफलता का पैमाना मान लिया जाता है। कई कलाकारों के लिए शरीर की बनावट ही उनकी स्क्रीन-इमेज का हिस्सा बन जाती है। लेकिन डॉक्टरों के अनुसार सिर्फ बहुत पतला होना ही सेहत का सही संकेत नहीं है। चिकित्सा भाषा में असली फिटनेस का मतलब शरीर का संतुलित, मजबूत और काम करने लायक होना है।
डॉक्टरों का कहना है कि वजन कम करने के लिए बहुत तेज़ी से अपनाई जाने वाली डाइट, खाना छोड़ देना, जरूरत से ज्यादा व्यायाम और कम कैलोरी लेना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे शरीर में कमजोरी, थकान, चक्कर आना, खून की कमी, आयरन की कमी, प्रोटीन की कमी और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आ सकती है। कई बार शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन भी बिगड़ जाता है, जिसे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन कहा जाता है। यह स्थिति दिल, मांसपेशियों और पूरे शरीर पर असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर का लीन बॉडी मास यानी वसा रहित शरीर द्रव्यमान भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें मांसपेशियां, हड्डियां, अंग और शरीर के अन्य जरूरी हिस्से शामिल होते हैं। अगर वजन बहुत तेजी से घटाया जाए, तो सिर्फ चर्बी ही नहीं बल्कि मांसपेशियां भी कम होने लगती हैं। इससे शरीर कमजोर हो जाता है और व्यक्ति जल्दी थकने लगता है। इसी वजह से डॉक्टर वजन घटाने में संतुलन पर जोर देते हैं, न कि सिर्फ पतलेपन पर।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है। जब किसी व्यक्ति पर “परफेक्ट बॉडी” का दबाव बढ़ता है, तो वह अपने शरीर से असंतुष्ट रहने लगता है। इससे आत्मविश्वास कम हो सकता है, तनाव बढ़ सकता है और खाने से जुड़ी गलत आदतें विकसित हो सकती हैं। युवा वर्ग, खासकर सोशल मीडिया और फिल्मी छवियों से प्रभावित लोग, कई बार यह सोचने लगते हैं कि पतला शरीर ही सुंदर और सफल शरीर है। डॉक्टर इसे गलत धारणा मानते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार फिटनेस का सही अर्थ है—संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पूरी नींद, मानसिक शांति और समय-समय पर स्वास्थ्य की जांच। किसी भी व्यक्ति के लिए वजन घटाने का तरीका उसकी उम्र, शरीर की बनावट, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए। बिना सलाह के शरीर को बहुत दुबला करना खतरनाक हो सकता है।
फिल्म इंडस्ट्री को भी यह समझना होगा कि सौंदर्य का एक ही मानक नहीं हो सकता। स्वस्थ, ऊर्जा से भरा, आत्मविश्वासी और संतुलित शरीर ही सच्ची फिटनेस का प्रतीक है। डॉक्टरों की राय में पतला दिखना जरूरी नहीं, बल्कि स्वस्थ रहना जरूरी है। यही संदेश समाज, खासकर युवाओं तक पहुंचना चाहिए।

(लेखिका देश की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ है)

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