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फल्गुनिया के प्यार और प्रेम खातिर पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाने वाले माउंटेन मैन दशरथ मांझी के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर भारत रत्न देने की मांग उठी

अनिल मिश्र / गहलौर घाटी (गया जी)

बिहार प्रदेश के गया जिले की गहलौर घाटी में आज सोमवार 17 अगस्त को ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी का 19वां महापरिनिर्वाण दिवस (पुण्यतिथि) श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा, बाइक रैली और उनके अदम्य साहस को नमन करते हुए उन्हें भारत रत्न देने की मांग दोहराई गई। सर्वप्रथम प्राचीन, ऐतिहासिक नगरी गयाजी शहर के पूर्वी हिस्से में बसे मानपुर स्थित भूसंडा मैदान से गहलौर घाटी तक पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी के 19वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बाइक रैली का आयोजन किया गया।इस बाइक रैली का उद्घाटन बिहार के मंत्री एवं हम पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. संतोष कुमार सुमन ने किया। इस रैली में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और गहलौर घाटी पहुंचकर बाबा दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। इस अवसर पर गहलौर घाटी में आयोजित महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर केन्द्रीय मंत्री एवं हिन्दुस्तान अवामी मोर्चा के संयोजक जीतन राम मांझी, बिहार विधानसभा में अध्यक्ष एवं गया नगर विधायक प्रेम कुमार सहित गया जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित किया। वहीं राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल के कार्यालय में भी पर्वत पुरुष दशरथ मांझी का महापरिनिर्वाण दिवस मनाया गया।इस अवसर पर बिहार सरकार में मंत्री और हिन्दुस्तान अवामी मोर्चा के वरिष्ठ नेता संतोष कुमार सुमन ने कहा कि जिस शख्स ने अकेले पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया।जिनका नाम दशरथ मांझी किसी एक समाज तक सीमित नाम नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का उनका संघर्ष साहस, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। उन्होंने कहा कि बाबा के जीवन से खासकर समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, लगातार प्रयास से रास्ता निकाला जा सकता है—दशरथ मांझी का जीवन यही संदेश देता है।उन्होंने कहा कि पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का उनका संघर्ष साहस, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। उन्होंने कहा कि बाबा के जीवन से खासकर समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, लगातार प्रयास से रास्ता निकाला जा सकता है—दशरथ मांझी का जीवन यही संदेश देता है। के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और यह मांग प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा केंद्र सरकार के स्तर पर भी रखी गई है। उनका कहना था कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से दशरथ मांझी के योगदान को पहचान मिलने के साथ ही समाज के वंचित वर्गों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।इस बीच हिन्दुस्तान अवामी मोर्चा के वरिष्ठ नेता और सांसद प्रतिनिधि नंदलाल मांझी ने भी केंद्र सरकार से भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुसहर परिवार में जन्मे दशरथ मांझी ने करीब 22 साल तक पहाड़ काटकर रास्ता बनाने का काम किया। उन्होंने दावा किया कि उनके प्रयासों से वजीरगंज की दूरी करीब 55 किलोमीटर से घटकर लगभग 15 किलोमीटर रह गई। नंदलाल मांझी ने कहा कि बाबा के योगदान के अनुरूप उन्हें अभी तक वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार हैं। दरअसल दशरथ मांझी गया जिले के वर्तमान में मोहड़ा प्रखंड अंतर्गत गहलौर घाटी में सन् 1929 मे जन्म लेने वाले और 2007 में मृत्यु को प्राप्त करने वाले गहलौर गांव के एक साधारण मजदूर थे। पत्नी फाल्गुनी देवी की समय पर इलाज न मिलने से हुई मृत्यु के बाद उन्होंने अकेले 22 वर्षों (1960–1982) तक हथौड़े और छैनी से पहाड़ काटकर रास्ता बनाया था। इस रास्ते ने गहलौर और वजीरगंज के बीच की दूरी 55 किलोमीटर से घटाकर मात्र 15 किलोमीटर कर दी थी।दशरथ मांझी की कहानी धीरे-धीरे पूरे देश और दुनिया तक पहुंची। उनके जीवन पर बनी फिल्म मांझी “द माउंटेन मैन” ने करोड़ों लोगों तक उनका संघर्ष पहुंचाया। पूर्व में बिहार सरकार ने उन्हें सम्मानित किया है और भारत सरकार ने उनके सम्मान में पूर्व में डाक टिकट भी जारी किया है।अब देखना यह लाजिमी है कि प्यार और प्रेम के प्रतिमूर्ति एवं प्रेरणा देने वाले पर्वत पुरुष यानी माउंटेन मैन बाबा दशरथ मांझी को कब भारत सरकार भारत रत्न प्रदान करती है जो देश एवं प्रदेश बिहार और गया जिले के गहलौर घाटी के लिए सुखद अनुभूति रहेगी।

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