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रांची में वाम मोर्चा का उग्र प्रदर्शन, मोदी -शाह का पुतला दहन, वाम मोर्चा ने कहा संविधान और जल-जंगल-जमीन पर हमला बर्दाश्त नहीं

अनिल मिश्र / रांची

लोकसभा और राज्यसभा में मानसून सत्र के अंतिम दिन मजदूर, किसान और झारखंड विरोधी भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित कराए गए ”खनिज खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम 2026″ के विरोध में आज सोमवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के संयुक्त बैनर तले झारखंड की राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर विशाल विरोध प्रदर्शन एवं पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस मौके पर हजारों की संख्या में जुटे वाम मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंककर “काला कानून वापस लो”, “जल-जंगल-जमीन बचाओ” और “कॉरपोरेट का दलाल, मोदी सरकार” के नारे लगाए। पुतला दहन करने के बाद इस पुतला दहन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाकपा प्रदेश सचिव महेन्द्र पाठक ने कहा कि यह संशोधन विधेयक 2026 झारखंड के अस्तित्व पर सीधा हमला है। केंद्र सरकार पूंजीपतियों के दबाव में आकर आदिवासी-मूलवासी के संवैधानिक अधिकारों को बेचना चाहती है। जबकि दलित अधिकार मंच के अध्यक्ष भंते जैनेंद्र तथागत ने कहा यह कानून किसान मजदूर छात्र नौजवान वेलफेयर में काफी नुकसान होगा शेष लगाने का अधिकार समाप्त कर केंद्र की सरकार ने झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किया है। वहीं भाकपा-माले राज्य सचिव अनीता भट्टाचार्य ने कहा कि यह कानून खनिजों के राष्ट्रीयकरण के सिद्धांत को खत्म कर देगा और सारी खदानें 2-3 कॉरपोरेट घरानों को सौंप दी जाएंगी।
वहीं इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीपीएम नेता प्रफुल्ल लिंडा। ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से भरा राज्य है। इस कानून से यहां का विस्थापन 10 गुना बढ़ जाएगा।एआईएसएफ
के झारखंड प्रदेश राज्य सचिव विक्रम कुमार ने कहा कि – यह विधेयक से सीधे सीधे केंद्र सरकार हमारे यहाँ के खान खनिज पूंजीपतियों के हांथो मे सौपना चाहता है, जो झारखण्ड के छात्र नौजावानो को मंजूर नहीं हैं।इस बीच इन सभी वक्ताओं ने चार बिंदुओं पर विस्तार से आपत्ति दर्ज कराई:-1.सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का उल्लंघन: -दिनांक 25 जुलाई 2024 को 9 जजों की संविधान पीठ ने ”जमीन जिसकी, खदानें उसकी” का ऐतिहासिक फैसला दिया था। साथ ही कहा था कि राज्य सरकारें खनिजों पर टैक्स लगा सकती हैं। यह नया संशोधन उस फैसले को पलटकर केंद्र को सारे अधिकार दे रहा है। यह न्यायपालिका की अवमानना है।2. पांचवी अनुसूची एवं पेसा कानून पर हमला:-झारखंड का 90% क्षेत्र पांचवी अनुसूची के अंतर्गत आता है। यहां किसी भी खन परियोजना के लिए ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति जरूरी है। यह कानून ग्राम सभा की इस शक्ति को निष्प्रभावी कर सीधे कॉरपोरेट को लीज देगा। यह सरना धर्म, संस्कृति और स्वशासन पर हमला है।3. राज्य के अधिकारों की लूट:-खनिज रॉयल्टी और DMF फंड राज्य का अधिकार है। इस संशोधन से केंद्र उन पैसों को भी अपने पास रख लेगा। इससे झारखंड आर्थिक रूप से और कमजोर होगा।4. पर्यावरण एवं विस्थापन का संकट:-कानून में पर्यावरणीय मंजूरी और विस्थापन कानून को ढीला किया गया है। इससे जंगल कटेंगे, नदियां प्रदूषित होंगी और लाखों लोग बेघर होंगे।इन पार्टी की मांग:-
1. राष्ट्रपति महोदय इस विधेयक को तुरंत पुनर्विचार के लिए संसद की स्थायी समिति को भेजें।
2. झारखंड सरकार केंद्र पर दबाव बनाकर इस कानून को झारखंड में लागू न होने दे।
3. यदि 15 दिनों के अंदर सरकार पीछे नहीं हटती तो वाम दल मिलकर पूरे राज्य में चक्का जाम और राजभवन घेराव करेंगे।
इस कार्यक्रम में महेन्द्र पाठकप्रदेश सचिव भाकपा, भंते जैनेंद्र तथागत अध्यक्ष दलित अधिकार मंच, राजकुमार दास प्रदेश संयोजक दलित अधिकार मंच, अली अंसारी सेवानिवृत प्रधान शिक्षक, इश्क अंसारी,मुकेश कुमार,अखिलेश सिंह, विक्रम कुमार सिंह,आदिल खान,मनोज ठाकुर, श्यामल चक्रवर्ती,विजय सिंह,गुरु प्रसाद,चंदेश्वर प्रसाद सिंह,छुमो उरांव, भाकपा-माले से अनीता भट्टाचार्य राज्य सचिव, मनोज भट्ट,शुभेंदु सेन, सीपीएम से प्रफुल्ल लिंडा, वीरेंद्र कुमार,प्रतीक मिश्रा सहित तीनों पार्टियों के सैकड़ों कार्यकर्ता एवं आदिवासी-मूलवासी संगठन के लोग उपस्थित रहे।

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