मुख्यपृष्ठस्तंभअमेरिका को आंखें दिखा रहे हैं चीन, रूस, उत्तर कोरिया!

अमेरिका को आंखें दिखा रहे हैं चीन, रूस, उत्तर कोरिया!

मनमोहन सिंह

प्रशांत महासागर हमेशा से वैश्विक राजनीति और व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में शक्ति-संतुलन तेजी से बदला है। एक तरफ जहां अमेरिका ने अपनी प्राथमिकताओं का पुनर्मूल्यांकन करते हुए क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी में कुछ बदलाव किए हैं। वहीं दूसरी तरफ चीन, रूस और उत्तर कोरिया ने इस इलाके में अपनी सैन्य गतिविधियां और साझा युद्धाभ्यास तेज कर दिए हैं। सवाल यह है कि यह ‘त्रिगुट’ (चीन, रूस, उत्तर कोरिया) अमेरिका को आंखें क्यों दिखा रहा है?
चीन की वैश्विक महत्वाकांक्षा: चीन इस क्षेत्र में अमेरिका के पारंपरिक वर्चस्व को खत्म कर खुद को एशिया-प्रशांत की मुख्य शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। ताइवान और दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा मजबूत करने के लिए वह लगातार अपनी नौसेना क्षमता बढ़ा रहा है।
रूस का कूटनीतिक जवाब: यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा अलग-थलग किए जाने पर रूस ने एशिया की ओर रुख किया है। चीन और उत्तर कोरिया के साथ मिलकर वह अमेरिका को यह संदेश देना चाहता है कि उसके पास प्रशांत क्षेत्र में भी मजबूत सहयोगी मौजूद हैं।
उत्तर कोरिया का आक्रामक रुख: किम जोंग उन के नेतृत्व में उत्तर कोरिया अमेरिका और उसके सहयोगियों (जापान और दक्षिण कोरिया) को दबाव में रखने के लिए लगातार मिसाइल परीक्षण कर रहा है। रूस और चीन के कूटनीतिक समर्थन ने उसके हौसले और बुलंद किए हैं।
तीन-पक्षीय गठजोड़ की प्रमुख रणनीतियां
चीन और रूस की वायुसेना व नौसेना अब जापानी सागर और प्रशांत महासागर में संयुक्त गश्त कर रही हैं। उत्तर कोरिया और रूस के बीच रक्षा समझौते गहरे हुए हैं, जहां हथियारों और सैन्य तकनीक का आदान-प्रदान हो रहा है। तीनों देश मिलकर जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान पर सैन्य व मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहे हैं, जो अमेरिका के प्रमुख सुरक्षा साझेदार हैं।
अमेरिका और वैश्विक राजनीति के लिए इसके मायने क्या हैं? इस त्रिगुट का एक साथ आना अमेरिका के लिए दोहरी चुनौती पैदा करता है। अमेरिका को अब न केवल यूरोप (रूस के कारण) बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (चीन और उत्तर कोरिया के कारण) में भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ सक्रिय रखना पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता यह तनाव एक ‘नए शीत युद्ध’ की नींव रख रहा है, जहां एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं, तो दूसरी तरफ चीन, रूस और उत्तर कोरिया का नया रणनीतिक अक्ष।

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