मुख्यपृष्ठस्तंभचंपत राय-अनिल मिश्र को क्लीन चिट...तो चंदा किसने चुराया?

चंपत राय-अनिल मिश्र को क्लीन चिट…तो चंदा किसने चुराया?

-आठ आरोपी गिरफ्तार, लेकिन बड़ा सवाल, व्यवस्था की
-निगरानी किसकी थी और गड़बड़ी महीनों तक दिखी क्यों नहीं?

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी रिपोर्ट को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्र को जांच में राहत मिली है, जबकि रिपोर्ट में आठ गिरफ्तार लोगों को आरोपी माना गया है। लेकिन यहीं से असली सवाल शुरू होता है, अगर शीर्ष जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की चोरी में कोई भूमिका नहीं थी, तो इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर चल वैâसे रही थी? एसआईटी ने जिन आठ लोगों को आरोपी माना है, उन पर प्रत्यक्ष चोरी या हेराफेरी का आरोप है, मगर प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल इससे खत्म नहीं होता।
मामला और दिलचस्प इसलिए है क्योंकि जांच के दौरान चढ़ावे के प्रबंधन में एसओपी के गंभीर उल्लंघन की बात सामने आई थी। यहां तक कि चंपत राय के एक कथित पत्र में वित्तीय प्रबंधन और एसओपी तैयार करने को लेकर अनिल मिश्र की भूमिका पर सवाल उठने की खबर भी सामने आई थी। इसलिए क्लीन चिट का मतलब यह नहीं कि सारे सवाल खत्म हो गए। अब तीन सवाल और तीखे हो जाते हैं। चोरी किस स्तर पर हुई, निगरानी व्यवस्था क्यों विफल रही और जिम्मेदार अधिकारियों या पदाधिकारियों को समय रहते भनक क्यों नहीं लगी? और एक अहम बात, यह कि यह सरकारी एसआईटी की रिपोर्ट है; सुप्रीम कोर्ट से संबंधित जांच का पहलू अभी अलग से जारी बताया गया है।
यानी चोरों के नाम मिल गए होंगे, लेकिन ‘चोरी होने दी किसने?’इस सवाल का जवाब अभी भी बाकी है।
सीएम योगी के आदेश पर बनी थी पहली एसआईटी
मंदिर के दान में अनियमितताओं की जांच चल रही थी, तभी इन दोनों ने २७ जून को ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। इस मामले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में बनी दूसरी एसआईटी कर रही है। पहली एसआर्ईटी १३ जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर बनी थी। यह ट्रस्ट की मांग पर बनाई गई थी। इसकी अध्यक्षता लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने की थी।

 

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