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सीधा सवाल : एमबीएमसी की पारदर्शिता पर सवाल… महासभा से जनता को क्यों रखा जा रहा दूर?

 -महासभा की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग को लेकर जेन-जी का हल्लाबोल

सुरेश गोलानी

मीरा-भायंदर महानगरपालिका की महापौर डिंपल मेहता द्वारा कामकाज में पारदर्शिता और अवैध निर्माण कार्यों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) का दावा भाजपा का एक और नया जुमला बनकर रह गया है। एक तरफ शहर में बिना अनुमति के चल रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर रोक लगाने में मनपा प्रशासन पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाते हुए महासभा की लाइव स्ट्रीमिंग से भी दूरी बनाई जा रही है।
महासभा का लाइव प्रसारण नहीं होने से जनता के मन में यह सवाल पैदा हो रहा है कि आखिर सत्ताधारी पक्ष और प्रशासन नागरिकों से क्या छिपाना चाहता है? मनपा की महासभा के कामकाज में पारदर्शिता लाने की मांग को लेकर शहर के युवाओं यानी जेन-जी ने अनोखे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। महासभा की बैठक के दौरान बड़ी संख्या में युवा मनपा के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से खड़े होकर विरोध जताते नजर आए। प्रदर्शनकारी युवाओं की मांग है कि महासभा की कार्यवाही का मनपा के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से सीधा प्रसारण किया जाए। इस दौरान युवाओं ने हाथों में अपनी मांगों से जुड़े पोस्टर और स्लोगन लेकर महापौर तथा सभी दलों के नगरसेवकों का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया।
महासभा की बैठकों में बर्बाद किए जाते हैं कर दाताओं के पैसे
युवाओं का कहना है कि महानगरपालिका पूरी तरह नागरिकों के टैक्स के पैसे से चलने वाली संस्था है। महासभा की बैठकों के दौरान चाय, नाश्ता, पानी और भोजन आदि पर जनता के टैक्स के पैसों से हर साल लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं। इसके बावजूद उसी महासभा के कामकाज को नागरिकों से दूर रखना और उसका सीधा प्रसारण नहीं करना, प्रशासन की पारदर्शिता और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, ‘जिन नागरिकों के वोटों की बदौलत ये नगरसेवक महासभा में बैठते हैं, उन्हीं नागरिकों से महासभा के भीतर होने वाला कामकाज आखिर क्यों छिपाया जा रहा है?’

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