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महायुति सरकार में अब एमएमआरडीए में इंजीनियर भर्ती घोटाला!.. २३५ पदों की भर्ती में गड़बड़ी, जांच की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। नीट और टीईटी पेपर लीक के बाद अब मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की इंजीनियर भर्ती परीक्षा में भी गड़बड़ी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव धनंजय शिंदे ने २३५ पदों के लिए आयोजित एमएमआरडीए इंजीनियर भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में गहन जांच कराने की मांग की है।
तिलक भवन में पत्रकार वार्ता के दौरान शिंदे ने कहा कि १४ अगस्त २०२६ को घोषित परिणाम और मेरिट सूची को लेकर अभ्यर्थियों में भारी असंतोष है। उन्होंने दावा किया कि मेरिट सूची के प्रारंभिक अध्ययन में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके मुताबिक, २०० में से १९० से अधिक अंक हासिल करने वाले कई अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र एक ही हैं। ऐसे में यहां बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है।
शिंदे के अनुसार, मेरिट में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले अभ्यर्थी एक ही केंद्र से हैं। इसी तरह चौथे, पांचवें और छठे स्थान के अभ्यर्थी भी एक ही केंद्र से बताए गए हैं। इसके अलावा सातवें, आठवें, नौवें, दसवें, ग्यारहवें, चौदहवें और पंद्रहवें स्थान पर आने वाले अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र भी समान होने का दावा किया गया है।
एमएमआरडीए भर्ती में ‘२०० में २००’ का रहस्य!
एमएमआरडीए की २३५ पदों की भर्ती परीक्षा में कुछ उम्मीदवारों के सामान्यीकृत अंक २०० तक पहुंचने से पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। २६,७४९ आवेदकों में २०,४५९ ने परीक्षा दी थी। अलग-अलग सत्रों के प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को बराबर करने के लिए सामान्यीकरण किया गया। प्राधिकरण ने किसी गड़बड़ी से इनकार किया है। ३४० आपत्तियों का निपटारा हो चुका है और अस्थायी मेरिट सूची का सत्यापन जारी है। अब अंतिम सूची पर नजर है।

 

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