मुख्यपृष्ठनए समाचारसोशल मीडिया पर सेंसरशिप की सुनामी?..आवाज दबाने पर उतारू मोदी सरकार

सोशल मीडिया पर सेंसरशिप की सुनामी?..आवाज दबाने पर उतारू मोदी सरकार

-५ महीने में दिए १.९५ लाख रुपए कंटेंट ब्लॉिंकग ऑर्डर!
-दि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में हुआ चौंकानेवाला खुलासा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटाने को लेकर केंद्र सरकार एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर है। `द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मार्च से जुलाई २०२६ के बीच सरकार और विभिन्न एजेंसियों की ओर से इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को करीब १.९५ लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे गए। रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार जेन-जी की आवाज से डरती है और सोशल मीडिया पर सेंसरशिप बढ़ा रही है।
`द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के जरिए पहले मिले रिकॉर्ड के अनुसार अक्टूबर २०२४ से अक्टूबर २०२५ के बीच पूरे साल में १९ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को कुल २,३१२ ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजे गए थे। इसके मुकाबले २०२६ के सिर्फ पांच महीनों में आदेशों की संख्या कई गुना बढ़ गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन भी चल रहा था।
मेटा ने शुरू की ऑटोमैटिक कार्रवाई
अंग्रेजी अखबार रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा तय २ से ३ घंटे की समय-सीमा का पालन करने के लिए मेटा ने अपने सिस्टम को गृह मंत्रालय के `सहयोग’ पोर्टल से जोड़ दिया है। दावा किया गया है कि अब इस पोर्टल के जरिए आने वाले सरकारी निर्देशों पर संबंधित कंटेंट बिना अलग से ह्यूमन रिव्यू के स्वत: हटाया जा सकता है।
पब्लिक बोली, `प्रâीडम ऑफ स्पीच पर सीधा हमला’
सोशल मीडिया यूजर्स पूछ रहे हैं, `ये तो सीधे तौर पर प्रâीडम ऑफ स्पीच पर सीधा हमला है। अगर सरकार के काम पर सवाल उठाना गलत नहीं, तो कंटेंट हटाने की इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों? आलोचना को दबाने के बजाय जवाब देना लोकतंत्र की पहचान है।
`लोकतांत्रिक अधिकार पर सुनियोजित हमला’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को मोदी सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर भारतीय के बोलने, सवाल करने और असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकार पर सुनियोजित हमला किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की सोशल मीडिया रोक लगाने की कार्रवाई उतनी ही निंदनीय है, जितना युवाओं पर किया गया लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल करना है।

अन्य समाचार