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युवाओं को दिमागी नक्सल बताना छोड़िए,सवालों का जवाब दीजिए: सीजेपी

 -राजनीतिक लेबल लगाकर छात्रों के सवाल मत दबाइए

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों, कथित बाहरी तत्वों और ‘अर्बन नक्सल’ या ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर तीखा पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार युवाओं के वास्तविक मुद्दों, एफआईआर, पुलिस कार्रवाई, मुआवजा और जवाबदेही से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक लेबलिंग का सहारा ले रही है। सीजेपी का कहना है कि यदि छात्रों पर हमला हुआ, पुलिस ज्यादती के आरोप लगे और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंच गया, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही।
‘एफआईआर क्यों नहीं? जवाबदेही से क्यों बच रही सरकार?
पार्टी ने आरोप लगाया कि जिन घटनाओं में कार्रवाई की मांग की जा रही है, उनमें सरकार और संबंधित एजेंसियां स्पष्ट रुख लेने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझी हुई हैं। सीजेपी ने कहा, ‘आप हमें अपनी राजनीतिक गेम में मत उलझाइए। युवाओं को राजनीतिक मोहरा मत बनाइए। सवाल यह है कि कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, एफआईआर क्यों नहीं हो रही और जिन वादों पर आंदोलन वापस लिया गया था, उन पर अमल क्यों नहीं हो रहा?’
‘अर्बन नक्सल’, ‘दिमागी नक्सल’ पर तीखा हमला
सीजेपी ने सरकार और सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ‘अर्बन नक्सल’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे राजनीतिक विशेषणों को भी गैर-जिम्मेदाराना बताया। पार्टी का कहना है कि असहमति रखने वाले छात्रों, कार्यकर्ताओं या राजनीतिक विरोधियों को इस तरह के शब्दों से ब्रांड करना लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है। ‘कभी अर्बन नक्सल, कभी दिमागी नक्सल, इस तरह की बयानबाजी करके युवाओं के असली सवालों से देश का ध्यान मत भटकाइए। देश का युवा अब ऐसे राजनीतिक लेबल से डरने वाला नहीं है।’
‘अगर इतनी बड़ी साजिश थी तो रोक कौन रहा था?’
सीजेपी ने सरकार की कथित ‘बाहरी तत्वों की घुसपैठ’ वाली दलीलों को उसी पर पलट दिया। पार्टी ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में यह मानती है कि छात्र आंदोलन में ऐसे तत्व घुस आए थे जिन्हें वह ‘दिमागी नक्सल’ या खतरनाक तत्व बता रही है, तो यह सवाल गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी पर भी उठता है। सीजेपी ने कहा, ‘अगर इतने खतरनाक तत्व आंदोलन में घुस आए और सरकार उन्हें रोक नहीं पाई, तो जिम्मेदारी किसकी है? अगर यह आपकी अपनी दलील है, तो फिर गृह मंत्रालय की जवाबदेही क्यों तय नहीं होनी चाहिए?’ पार्टी ने इसे आगे बढ़ाते हुए यहां तक कहा कि यदि सरकार के आरोप सही मान लिए जाएं तो गृह मंत्री समेत सरकार को अपनी प्रशासनिक विफलता की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
मंत्री हटाना ही बताता है कि गड़बड़ी थी
सीजेपी ने यह दावा भी दोहराया कि छात्र आंदोलन और उससे पैदा हुए राजनीतिक दबाव के बाद सरकार को अपने एक मंत्री को हटाना पड़ा। पार्टी के मुताबिक यह स्वयं इस बात का संकेत है कि व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं। हालांकि सरकार और सीजेपी के बीच इस मुद्दे की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग है।
सीजेपी ने कहा कि युवाओं की मांग बेहद सीधी है, एफआईआर पर पैâसला कीजिए, पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराइए, पीड़ित परिवारों को मुआवजा दीजिए और २५ जुलाई को किए गए वादों को पूरा कीजिए। पार्टी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह राजनीतिक बयानबाजी से मुद्दे को भटकाने की कोशिश न करे। ‘देश के युवाओं को छलने की कोशिश मत कीजिए। उन्हें अर्बन नक्सल, दिमागी नक्सल या किसी पार्टी का एजेंट बताकर उनके सवाल खत्म नहीं किए जा सकते। वादा किया है तो निभाइए, वरना जवाब सड़क पर मिलेगा।’

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