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महाकुंभ के ‘चमकते’ अरैल बांध रोड पर उभरे ‘जानलेवा गड्ढे’, प्रशासन कुंभकर्णी नींद में!

– त्रिवेणीपुष्प और शिवालय पार्क आने वाले पर्यटकों पर मंडराया खतरा
– संतों और पुजारियों ने कमिश्नरेट प्रशासन को चेताया, युद्धस्तर पर मरम्मत की मांग

राजेश सरकार / प्रयागराज

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समेटे प्रयागराज से पौन घंटे की दूरी पर स्थित पौराणिक पर्यटन स्थल अरैल अब प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है। महाकुंभ 2025 के दौरान जिस अरैल बांध रोड को चमकाने के लिए योगी सरकार और केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए थे, आज वही सड़क भारी बारिश के बाद खतरनाक गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। यह मार्ग अब सुगम यातायात के बजाय राहगीरों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का कुआं) बनता जा रहा है।
आस्था के केंद्रों पर लग रहा ‘ग्रहण’
बता दें कि इस मुख्य मार्ग पर कई नामचीन अंग्रेजी विद्यालय, सुलटांकेश्वर महादेव, बेनी माधव और सोमेश्वर नाथ महादेव जैसे अति प्राचीन मंदिर स्थापित हैं। यहां रोजाना हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा सौंदर्यीकृत किए गए त्रिवेणीपुष्प और नवनिर्मित शिवालय पार्क को देखने के लिए भी पर्यटकों का तांता लगा रहता है। लेकिन वर्तमान में इस सड़क की बदहाली के कारण श्रद्धालुओं को पुण्य कमाने के चक्कर में जान के लाले पड़ रहे हैं।
संतों और पुजारियों में गुस्सा
सड़क की इस दुर्दशा पर अरैल तटबंध क्षेत्र के संतों और मठ-मंदिरों के पुजारियों का आक्रोश भड़क उठा है। बेनी माधव मंदिर के पुजारी दामोदर दास पंडित और चक्र माधव मंदिर के पुजारी अवधेश दास जी ने प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारी यातायात के दबाव वाले इस मार्ग पर गुणवत्ताविहीन काम की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है।
सच्चा बाबा संस्कृत महाविद्यालय, तपस्वी बाबा आश्रम, फलाहारी बाबा आश्रम और महर्षि महेश योगी आश्रम जैसी विश्व प्रसिद्ध संस्थाओं को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग की नए सिरे से और पूरी गुणवत्ता के साथ मरम्मत होनी बेहद जरूरी है। अरैल के समस्त संतों ने कमिश्नरेट प्रशासन से मांग की है कि कागजी घोड़े दौड़ाने के बजाय धरातल पर युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।

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