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काशी की परंपरा पर चोट? काल भैरव महंत के साथ हुए व्यवहार पर विरोध

वाराणसी में काल भैरव मंदिर के महंत अवशेष पांडे उर्फ ‘कल्लू महाराज’ के साथ हालिया कथित अपमानजनक व्यवहार को लेकर महंत समाज में गहरा रोष व्याप्त है। कुछ दिन पूर्व मंदिर में आरती के समय स्थानीय पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से आरती में बाधा डालने का मामला सामने आया। वायरल हुए एक वीडियो में एक पुलिसकर्मी महंत को वाहन से रोककर कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करता दिखाई दे रहा है। इस घटना को लेकर महंत और उपस्थित श्रद्धालुओं में आक्रोश व्याप्त है।
वाराणसी धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से ‘काशी’ के नाम से विख्यात है। ऐसे में इस तरह के विवादित व्यवहार को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। शहर में तीर्थाटन और पर्यटन दोनों में इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय काशीवासियों एवं नियमित दर्शनार्थियों को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए सरकार ने अलग से व्यवस्था और प्रवेश द्वार बनाए हैं, लेकिन सीमित स्थल पर स्थित और परंपरा के अनुरूप ‘कोतवाल काशी’ कहे जाने वाले काल भैरव मंदिर के लिए अब तक ऐसी समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है।
काल भैरव मंदिर में समय-समय पर सुरक्षा प्रहरियों और बैरियर की अलग-अलग तैनाती रहती है। बीते दिनों महंत अवशेष पांडे की ड्यूटी के दौरान परिसर में पुलिस द्वारा उनका आवागमन रोके जाने की बात सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ महंत समाज में भी असंतोष और नाराजगी बढ़ी है।
महंत समाज का कहना है कि महंतों के पूजा-पाठ एवं परंपरागत कर्तव्यों में किसी भी प्रकार की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाज की ओर से प्रशासन से मांग की जा रही है कि महंतों के सुचारु आगमन-प्रस्थान के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं।
स्थानीय विद्वानों और धर्मगुरुओं का तर्क है कि काशी की धार्मिक परंपराओं का संचालन समय के साथ सौहार्दपूर्ण ढंग से होना चाहिए। सुरक्षा एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं का सम्मान करते हुए भी श्रद्धालुओं और पुरोहितों के साथ संयम एवं शिष्टता बनाए रखी जानी चाहिए। प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसे मामलों की त्वरित जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही काल भैरव मंदिर के लिए स्थायी एवं सुव्यवस्थित प्रवेश-नियंत्रण तथा पूजा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यदि प्रशासन शीघ्र और संवेदनशील कदम नहीं उठाता है, तो महंत समाज एवं स्थानीय समुदाय प्रशासन से कार्रवाई की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज करा सकते हैं। काशी की पवित्रता और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए संतुलित, सम्मानजनक और व्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

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