मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिटीएमयू दीक्षारंभ में सीसीएसआईटी के न्यू स्टुडेंट्स ने समझा शैक्षणिक परिवेश

टीएमयू दीक्षारंभ में सीसीएसआईटी के न्यू स्टुडेंट्स ने समझा शैक्षणिक परिवेश

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-सीसीएसआईटी के इंडक्शन प्रोग्राम-दीक्षारंभ-2026 में न्यू स्टुडेंट्स से यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक परिवेश, सुविधाएं, अवसर और मूल्यों को लेकर सार्थक संवाद हुआ। ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षारंभ में बीटेक-एआई/एमएल/डीएल, बीटेक-डेटा साइंस, बीटेक-साइबर सिक्योरिटी, बीटेक-आईबीएम, एमसीए, एमटेक-कंप्यूटर साइंस, बीसीए और एमएससी-एनिमेशन कोर्स के नव प्रवेशित छात्र-छात्राएं शामिल रहे। समारोह में टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन के संग-संग डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आरके द्विवेदी, डीन स्टुडेंट्स वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह, सीटीएलडी के डायरेक्टर प्रो. पंकज कुमार सिंह, सीआरसी के श्री अरुण सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रो. एसके सिंह, संयुक्त रजिस्ट्रार डॉ. वैभव रस्तौगी आदि की भी ख़ास उपस्थिति रही। ऑडी में दीक्षारंभ से पूर्व सभी मेहमानों के मंगलागमन पर तिलक करके स्वागत किया गया। समापन वोट ऑफ थैंक्स एवम् राष्ट्रगान के साथ हुआ।
टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन ने स्वॉट को किया परिभाषित
कुलपति प्रो. वीके जैन स्वॉट- स्ट्रेंथ, वीकनेस, अपॉच्यूनिटी एंड थ्रेट को परिभाषित करते हुए मौजूदा वक्त में इनकी जरूरत को विस्तार से समझाया। उल्लेखनीय है, स्वॉट एनालिसिस रणनीतिक योजना बनाने का एक प्रभावी टूल है, जो किसी संगठन या व्यक्ति की आंतरिक क्षमताओं और बाहरी माहौल का विस्तृत आकलन करता है। उन्होंने नवागत स्टुडेंट्स को तकनीकी परिवर्तनों से निपटने के लिए नियमितता और निरंतरता का मूल मंत्र दिया। साथ ही बोले, ऑनलाइन वीडियो ट्यूटोरियल्स और यूट्यूब वीडियो लेक्चर्स ज्ञान में वृद्धि नहीं करते हैं। ये केवल सूचानाएं प्रदान करते हैं। टीएमयू के आदर्श वाक्य- सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र पर बोलते हुए वर्तमान में जीवन में इसकी सार्थकता को गहनता से समझाया।
डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने उद्योगोन्मुखी शिक्षा पर डाला प्रकाश
टीएमयू की डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने स्टुडेंट्स को यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक व्यवस्था, नवाचार, उद्यमिता, अकादमिक एवम् इंडस्ट्री सहयोग के विभिन्न अवसरों से परिचित करात हुए यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक संरचना और गुणवत्तापूर्ण, लचीली एवं उद्योगोन्मुखी शिक्षा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि टीएमयू में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम-सीबीसीएस और आउटकम बेस्ड एजुकेशन-ओबीई को वर्ष 2019 से सभी कार्यक्रमों में लागू किया गया है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-एनईपी 2020 को भी यूनिवर्सिटी के सभी कार्यक्रमों में लागू किया गया है, जिससे स्टुडेंट्स को बहुविषयक शिक्षा, शैक्षणिक लचीलापन और समग्र विकास के व्यापक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। प्रो. जैन ने यूनिवर्सिटी के विभिन्न एमओयू, अकादमिक एवम् इंडस्ट्री सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से स्टुडेंट्स को उद्योग विशेषज्ञों से संवाद, व्यावहारिक अनुभव और अपने क्षेत्र में हो रहे नवीनतम बदलावों को समझने के अवसर मिलते हैं। उन्होंने टीएमयू में उपलब्ध बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर, टिंकरिंग लैब, उद्यमिता एवम् स्टार्टअप मार्गदर्शन सुविधाओं की जानकारी भी दी।
नवाचार और अनुसंधान को छात्र जीवन का महत्वपूर्ण हिस्साः प्रो. द्विवेदी
कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी ने अपने सारगर्भित संबोधन में कहा, दो, तीन या चार वर्ष केवल डिग्री हासिल करने के नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व और भविष्य को मजबूत बनाने के वर्ष हैं। उन्होंने कहा, अनुशासन और नियमितता सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने नवाचार और अनुसंधान को छात्र जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्हें नए विचारों के संग अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने, शिक्षकों का सम्मान करने, समय का मूल्य समझने और निरंतर उत्कृष्टता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इंस्टीट्यूशंस इन्नोवेशन काउंसिल की गतिविधियों के संग-संग स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन, इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- स्मार्ट सरीखी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए नवप्रवेशित स्टुडेंट्स से भी इन प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने स्टुडेंट्स को करियर की तैयारी पहले दिन से शुरू करने की सलाह दी। दीक्षारंभ में प्रो. प्रदीप कुमार, डॉ. नूपा राम चौहान, श्री हरजिंदर सिंह, श्री गौरव राजपूत, श्री आयुष शर्मा, डॉ. अमित सिंह, श्री मनीष तिवारी, श्री निखिल सक्सेना, डॉ. संदीप वर्मा भी मौजूद रहे। संचालन डॉ. माधव शर्मा ने किया।

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