सामना संवाददाता / मुंबई
गणेशोत्सव के लिए मुंबई से कोकण जाने वाले गणेशभक्तों को इस वर्ष एसटी महामंडल ने श्रद्धा और सुविधा के बजाय 43.50 फीसदी बढ़े किराए का ‘प्रसाद’ देने की तैयारी कर ली है। 17 जुलाई से लागू 13.50 फीसदी स्थायी किराया वृद्धि के बाद अब गौरी-गणपति उत्सव के दौरान ग्रुप बुकिंग से गांव जाने वाले यात्रियों पर अतिरिक्त 30 फीसदी अधिभार लगाया गया है। गणेशभक्त कोकणवासी प्रवासी संघ ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए ग्रुप बुकिंग रोक दी है।
संघ के कार्याध्यक्ष दीपक चव्हाण ने सवाल उठाया है कि एक ओर सरकार और एसटी महामंडल गणेशोत्सव को कोकणवासियों की श्रद्धा, संस्कृति और भावनाओं से जुड़ा पर्व बताते हैं, तो दूसरी ओर इसी पर्व के दौरान यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है?
‘प्रवासी हमारे दैवत’ या दैवत की ही जेब पर डाका?
एसटी महामंडल का नारा है— ‘प्रवाशियों की सेवा के लिए’ और ‘प्रवासी हमारे दैवत हैं।’ लेकिन गणेशोत्सव के दौरान 30 फीसदी अधिभार और पहले से लागू 13.50 फीसदी किराया वृद्धि को देखते हुए संघ ने सवाल किया है कि आखिर यह सेवा है या यात्रियों की आर्थिक परीक्षा?
दीपक चव्हाण ने कहा कि यदि गणेशोत्सव वास्तव में कोकणवासियों की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है, तो इस दौरान एसटी को यात्रियों को राहत देनी चाहिए थी। इसके बजाय अतिरिक्त अधिभार लगाकर महामंडल ने गणेशभक्तों को महंगाई का झटका दिया है।
700 से अधिक बसों का नियोजन, फिर भी अधिभार क्यों?
गणेशभक्त कोकणवासी प्रवासी संघ के अनुसार, इस वर्ष कोकण जाने वाले यात्रियों के लिए 700 से अधिक एसटी बसों का नियोजन किया गया है। इसका नियोजन महामंडल को सौंपा गया है। संघ का कहना है कि ग्रुप बुकिंग 1 अगस्त से शुरू होनी अपेक्षित थी, लेकिन अतिरिक्त 30 फीसदी अधिभार के कारण बुकिंग प्रक्रिया में करीब 20-22 दिनों की देरी हुई।
संघ ने यह भी आरोप लगाया कि अतिरिक्त अधिभार की जानकारी सार्वजनिक रूप से पहले नहीं दी गई। ग्रुप बुकिंग के लिए पहुंचे यात्रियों को प्रत्यक्ष रूप से बढ़े हुए किराए का सामना करना पड़ा।
मंत्री के बयान और एसटी के फैसले में विरोधाभास?
परिवहन मंत्री तथा एसटी महामंडल के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक द्वारा गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई गई है। ऐसे में संघ ने सवाल उठाया है कि यदि नफा-नुकसान का विचार किए बिना गणेशभक्तों को सुविधा देने की नीति है, तो फिर 30 फीसदी अतिरिक्त अधिभार किस नीति का हिस्सा है?
मंत्री और पालकमंत्री को निवेदन
संघ ने इस मुद्दे को लेकर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात कर निवेदन दिया है। साथ ही रत्नागिरी जिले के पालकमंत्री उदय सामंत से भी मुलाकात कर 30 फीसदी अधिभार पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।
गणेशभक्त कोकणवासीय प्रवासी संघ मुंबईको उम्मीद है कि सरकार गणेशभक्तों की भावनाओं और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करेगी। अन्यथा आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी संघ ने दी है।
अब सवाल सिर्फ किराए का नहीं, सरकार के ‘प्रवासी हमारे दैवत’ वाले दावे का है। गणेशोत्सव में घर लौटने वाला भक्त एसटी के लिए यात्री है या अतिरिक्त कमाई का साधन? इसका जवाब अब एसटी महामंडल और सरकार को देना होगा।
