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बिहार में सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के लिए नई नियमावली

अनिल मिश्र / पटना

कुछ दिनों पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले सहित देश में विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों ने बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था। इसका समर्थन पूरे देश के युवाओं ने किया। इसका असर अब झारखंड में भी दिखाई दे रहा है। इस आंदोलन में उम्रदराज युवाओं के साथ-साथ खासकर जेन-जी आयु वर्ग के युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जहां पिछले कई वर्षों से विपक्ष नरेंद्र मोदी सरकार पर कोई बड़ा दबाव नहीं बना सका, वहीं सोशल मीडिया के दौर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर व्यापक दबाव देखने को मिला। सोशल मीडिया की ताकत को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया मंचों पर कई रील और वीडियो के माध्यम से आम लोगों से जुड़ने की कवायद की है।
इसी बीच बिहार सरकार ने सोशल मीडिया, वेब पोर्टल और अन्य ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से जनहितकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया (संशोधन) नियमावली-2026 में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव किया है।
इसके तहत नियमावली की कंडिका-8 (vi), 11, 11(ए) और 11(बी) में आंशिक संशोधन कर सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त राशि के भुगतान की व्यवस्था को स्पष्ट किया जाएगा। साथ ही नई कंडिका-14(ए), 14(बी) और 14(सी) जोड़ी जाएगी। इसके तहत सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनल के फॉलोअर्स की समय-समय पर जांच, विशेष परिस्थितियों में गैर-सूचीबद्ध प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को विज्ञापन देने तथा नियमावली में किसी अस्पष्टता की स्थिति में आवश्यक स्पष्टीकरण की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना है। इसी उद्देश्य से बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को आज मंजूरी दी है।

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