राजेश सरकार / प्रयागराज
महाकुंभ के नाम पर विकास की गंगा बहाने का दावा करने वाले बिजली विभाग और ठेकेदारों की पोल दो दिन की मानसूनी बारिश ने ही खोलकर रख दी है। नैनी रेलवे स्टेशन रोड पर जल निकासी का पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हुआ जलभराव अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है। सड़क पर भरे पानी के चलते लाखों-करोड़ों की लागत से डाली गई अंडरग्राउंड विद्युत केबल खराब होकर सुलगने लगी। आरोप है कि काम में लापरवाही और गुणवत्ताविहीन सामग्री के इस्तेमाल के कारण राहुल मेडिकल स्टोर के सामने सड़क पर करंट उतर आया, जिसकी चपेट में आने से एक बेजुबान कुत्ते की दर्दनाक मौत हो गई।
दावे किए गए थे कि महाकुंभ के लिए डाली जा रही अंडरग्राउंड केबलिंग तकनीक का बेजोड़ नमूना होगी। लेकिन चंद घंटों के जलजमाव ने ठेकेदारों और विभागीय इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। पानी लगते ही केबल सुलगने लगी, जिससे काम की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठ रहे हैं। आज अगर उस करंट की चपेट में कोई राहगीर या स्कूली बच्चा आ जाता, तो इस कथित लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेता?
भीषण उमस में तड़पती रही जनता, कछुआ गति से चलता रहा काम
शुक्रवार को जब स्थिति गंभीर हो गई, तब बिजली विभाग ने केबल बदलने का काम शुरू किया। इसके लिए पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई। आसमान से बरसती आग और थामने का नाम न लेती भीषण उमस के बीच नैनी की जनता एक-एक मिनट काटने को मजबूर हो गई। घरों में पानी की बूंद-बूंद के लिए हाहाकार मच गया, लेकिन विभाग की सुस्ती बनी रही। समाचार लिखे जाने तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी और लोग अंधेरे तथा उमस से परेशान थे।
जनता सवाल उठा रही है कि ठेकेदारों और विभागीय तंत्र की कथित लापरवाही का खामियाजा आखिर करदाताओं को कब तक भुगतना पड़ेगा?
