राजेश विक्रांत
भारतीय नौसेना के सेवानिवृत कमांडर मनोज चौधरी द्वारा लिखित ‘मरीन ड्राइव मुंबई का दिल’ की शुरुआत इन पंक्तियों से होती है- आओ चलो.. भावनाओं के सागर में एक डुबकी लगाएं, मन की आंखों से मरीन ड्राइव पर चलो घूम आएं। इससे लगता है कि लेखक ने किस जज्बे और किस उत्साह से इस पुस्तक का सृजन किया है। जो कि इतिहास, भावना व लेखक की दूरदर्शी सोच का एक अप्रतिम संगम है।
यह पुस्तक 126 साल पुराने मरीन ड्राइव जिसे मुंबई का मियामी कहा जाता है, पर एक भावनात्मक, काव्यात्मक व कथात्मक पुस्तक है जिसमें रिपोर्ताज़, कविताओं व कहानियों के बहाने मरीन ड्राइव के इतिहास व वर्तमान के समस्त पहलुओं को समेटा गया है।
कमांडर मनोज चौधरी मूल रूप से कवि हैं। यह उनकी प्रकाशित होने वाली छठी पुस्तक है। इससे पूर्व प्रकाशित उनकी कविताएं एवं कहानी संग्रह को पाठकों के हर वर्ग से भरपूर सराहना व स्नेह प्राप्त हुआ है।
‘मरीन ड्राइव मुंबई का दिल’ 29 अध्यायों में बंटी हुई है- एक परिचय, मुंबई और मरीन ड्राइव का इतिहास, चरैवेति, गहमागहमी, मुस्कुराता जीवन, जीवन की आपाधापी में सुकून के पल, भौंरे की गुनगुन, रिश्तों की सुबह, ऐतिहासिक कल: गौरवान्वित आज, किनारे की मुस्कान, मुंबई पुलिस का योगदान, ढलती सांझ, सांस्कृतिक समागम, चांदनी रातें, खट्टी- मीठी बातें, बरसातें, सुलझती गुत्थी, प्राणवायु, सेना का भरोसा, ख्वाब अधूरे; कैसे हों पूरे- मरीन ड्राइव का विस्तार, मेरा नजरिया, गिरगांव चौपाटी, सफाई कर्मचारी, यातायात की बेहतर सुविधा, प्रवासी जीवन, विरासत, जन सैलाब, इंद्रधनुष का आठवां रंग, हवाई जहाज की पहली उड़ान और आतंक के साए पर ओंबले की जीत।
पुस्तक की भूमिका में शिक्षाविद डॉ दयानंद तिवारी ने एकदम सच ही लिखा है कि, “मुंबई सपनों का शहर, संघर्षों का संगम और अनगिनत कहानियों की जीवित धड़कन है। इस महानगर की आत्मा को यदि किसी एक स्थान पर महसूस करना हो, तो वह है मरीन ड्राइव। यह केवल समुद्र तट नहीं, बल्कि संवेदनाओं, स्मृतियों, संघर्षों और सपनों का विराट विस्तार है। प्रस्तुत पुस्तक ‘मरीन ड्राइव: मुंबई का दिल’ इसी जीवंत धड़कन का अत्यंत भावपूर्ण और ऐतिहासिक दस्तावेज है, जिसे कमांडर मनोज चौधरी ने अपने अनुभव, संवेदना और गहन अध्ययन के आधार पर रचा है।”
मुंबई और मरीन ड्राइव का इतिहास में लेखक ने सात द्वीपों से महानगर तक, प्राचीन साम्राज्य और बंदरगाहों का विकास, मध्यकालीन सत्ता परिवर्तन, पुर्तगाली और अंग्रेज दौर की शुरुआत, कोली समुदाय और मरीन ड्राइव की भूमि, बैकवे रिक्लेमेशन और मरीन ड्राइव का जन्म, असंभव से संभव तक और पूर्णता की ओर इन उप शीर्षकों के तहत इतिहास के पन्नों को खंगाला है।
इसके तहत इतिहास का मौन साधक डॉ इलियास मोजेस के बारे में जानकारी है जो पेशे से डॉक्टर थे पर सोच से दूरदर्शी इंजीनियर थे, उन्हीं के सुझावों पर ही मरीन ड्राइव का सपना साकार हुआ, जो आज केवल एक सैरगाह नहीं बल्कि एक मंच है जहां जीवन हर दिन नया अनुभव करता है।
लेखक कमांडर मनोज चौधरी के भीतर मुंबई के प्रति एक विशेष आत्मीयता है जिसे पुस्तक के हर पन्ने पर महसूस किया जा सकता है। इसमें मरीन ड्राइव के सौंदर्य के साथ इतिहास, पीड़ा, संघर्ष, करुणा व साहस को कहानियों व कविताओं के जरिए वर्णित किया गया है। पुस्तक में तीन कहानियां हैं- मुस्कुराता जीवन, रिश्तों की सुबह तथा खट्टी मीठी बातें। जबकि भौंरे की
गुनगुन, रिश्तों की सुबह, किनारे की मुस्कान, मुंबई पुलिस का योगदान, चांदनी रातें, खट्टी मीठी बातें, बरसातें, सुलझती गुत्थी, गिरगांव चौपाटी, इंद्रधनुष का आठवां रंग के साथ सबसे मार्मिक कविता आतंक के साए पर ओंबले की जीत नामक अध्याय में है।
‘मरीन ड्राइव मुंबई का दिल’ का सबसे महत्वपूर्ण लेख ‘ख्वाब अधूरे: कैसे हो पूरे: के तहत मरीन ड्राइव के विस्तार को लेकर लेखक का नजरिया है। इस पुस्तक को आरके पब्लिकेशन, मुंबई ने प्रकाशित किया है। पृष्ठ संख्या 160 है और मूल्य (पेपरबैक संस्करण) 595 रुपए।
