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वाराणसी में हुई आफत की बारिश तो शहर हुआ पानी-पानी…5 की गई जान

-पूर्वांचल का एम्स माने जाने वाले बीएचयू अस्पताल परिसर में भारी जलजमाव…चिकित्सकीय सेवा बुरी तरह हुई बाधित

उमेश गुप्ता / वाराणसी

पूर्वांचल में बारिश कहर बनकर टूट पड़ी है। वाराणसी में सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई झमाझम बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। महज 12 घंटे में 119.8 एमएम बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से शहर के कई इलाकों में जलजमाव हो गया। शहर की अधिकांश सड़कें पानी में डूब गईं और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। पूर्वांचल के आसमान में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से रातभर बारिश का दौर जारी रहा। वहीं बारिश में करंट से तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं दीवार ढहने से पति और पत्नी की भी जान चली गई है। इस तरह पांच लोगों की जान चली गई। इस आफत भरी बारिश को लेकर विपक्ष के लोगों ने जमकर डबल इंजन वाली सरकार पर कटाक्ष करते हुए काशी को क्योटो बनाने के मोदी सरकार वादों को आईना दिखाया।
पूर्वांचल की स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की व्यवस्थाएं मंगलवार को भारी बारिश के बाद जलभराव के कारण बुरी तरह प्रभावित नजर आईं। करीब 12 घंटे तक हुई बारिश थमने के बाद भी अस्पताल परिसर में पानी जमा रहा, जिससे मरीजों और तीमारदारों को इलाज के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अस्पताल के ओपीडी से लेकर जांच काउंटर तक जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भर गया। हालात ऐसे रहे कि आम दिनों में जहां ओपीडी में पांच से छह हजार मरीज परामर्श के लिए पहुंचते हैं, वहीं बारिश और जलभराव के चलते मरीजों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिली। कई मरीज बिना इलाज कराए ही वापस लौटने को मजबूर हुए।
जलभराव के कारण अस्पताल परिसर में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर तक चलाना मुश्किल हो गया। गंभीर मरीजों, बुजुर्गों और चलने में असमर्थ लोगों को उनके परिजन गोद में उठाकर अस्पताल के अंदर ले जाते दिखाई दिए। करीब 150 मीटर तक कमर भर पानी से होकर गुजरने के बाद मरीज ओपीडी की पर्ची ले पा रहे थे।
डॉक्टर से परामर्श के बाद ब्लड जांच के लिए सीसीआई लैब तक पहुंचने में भी मरीजों को करीब सौ मीटर तक पानी के बीच से गुजरना पड़ा। बाल रोग विभाग, ईएनटी और नेत्र रोग विभाग की ओर जाने वाले रास्तों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। पानी अधिक होने के कारण इन विभागों तक पहुंचना मरीजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रहा।
वहीं, अस्पताल के बाहर मालवीय गेट की स्थिति भी चिंताजनक नजर आई। यहां घुटने तक पानी भर गया, जिसके बीच से गुजरने के दौरान कई वाहनों के बंद होने की स्थिति सामने आई। जलभराव ने राहगीरों के साथ वाहन चालकों की परेशानी भी बढ़ा दी।
भारी बारिश के बाद बीएचयू अस्पताल परिसर और मालवीय गेट पर जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पूर्वांचल के हजारों मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले इस प्रमुख अस्पताल में बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए स्थायी व्यवस्था कब तक की जाएगी।

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