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स्त्री की मुक्ति पुरुष से अलग होने में नहीं-प्रो. किंगसन

-बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

स्त्री की मुक्ति पुरुष से अलग होने में नहीं उनके साथ सहयोग और समन्वय में है। विवाह स्त्रियों को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करता है। विवाहेतर या रखैल सम्बंधों से स्त्री मुक्ति नहीं होगी । जो प्रतिमान पहले स्त्रियों के लिए लागू थे वह अब पुरुषों पर भी लागू हैं। यह बातें काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर किंगसन सिंह पटेल ने कहीं। वे राणाप्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विवेकानंद सभागार में हिंदी विभाग की ओर से आयोजित बाबू धनंजय सिंह स्मृति व्याख्यानमाला में बतौर मुख्य वक्ता बोल रही थीं।
‘स्त्री आत्मकथाओं में परिवार विवाह और स्त्री मुक्ति का प्रश्न’ विषय पर उन्होंने कहा कि स्त्रियों की व्यथा लोकगीतों के माध्यम से सार्वजनिक होती है। औरत के हक को मारने वाले पुरुषों को अब पुनर्विचार करना होगा। स्त्री की मुक्ति पुरुषों को साथ लिए बिना नहीं होगी । यदि हमने इसपर मिलकर विचार नहीं किया तो परिवार और समाज व्यवस्था बिगड़ेगी। विषय प्रवर्तन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर इन्द्रमणि कुमार ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया। स्वागत प्राचार्य प्रोफेसर दिनेश कुमार त्रिपाठी, आभार ज्ञापन संयोजक डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय व संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने किया। हिंदी विभाग की प्रोफेसर रंजना पटेल, डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह व प्राचार्य ने मुख्य वक्ता को अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्य कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र प्रताप सिंह समेत समस्त शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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