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अली इमाम नकवी के उपन्यास ‘तीन बत्ती के रामा’ का विमोचन और चर्चा गोष्ठी

सामना संवाददाता / मुंबई 

जनवादी लेखक संघ, मुंबई और स्वर संगम फाउंडेशन द्वारा प्रसिद्ध उर्दू कथाकार अली इमाम नकवी के बहुचर्चित उपन्यास ‘तीन बत्ती के रामा’ (हिंदी संस्करण) के विमोचन समारोह और रचना-प्रक्रिया पर चर्चा का कार्यक्रम मीरा रोड स्थित विरंगुला केंद्र में आयोजित किया गया।
‘तीन बत्ती के रामा’ 1990 में प्रकाशित कथाकार अली इमाम नकवी का उर्दू उपन्यास है। ‘रेखता समूह’ ने इसे हिंदी में प्रकाशित किया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध कथाकार धीरेंद्र अस्थाना ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कथाकार असगर वजाहत, इकबाल नियाजी और हृदयेश मयंक मंच पर उपस्थित थे। पुस्तक के अनुवादक अनवर मिर्जा तथा असलम परवेज और वकार कादरी ने उपन्यास की रचना-प्रक्रिया पर अपने विचार व्यक्त किए।
धीरेंद्र अस्थाना ने ‘सबरंग’ पत्रिका के संपादन के समय अली इमाम नकवी से अपनी मुलाकात का जिक्र किया। ‘तीन बत्ती के रामा’ को एक बेहतरीन उपन्यास बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ही बैठक में पढ़ लिया जाने वाला उपन्यास है—यही इसकी सफलता का राज है।
वरिष्ठ कथाकार असगर वजाहत ने कहा कि श्रमिक व मजदूर वर्ग के जीवन की सच्चाई पर लिखना आसान काम नहीं है। मजदूरों और श्रमिकों के चेहरों की सादगी और सच्चाई के ताप को गहराई से जान पाना मध्यमवर्गीय जीवन जीने वाले लेखक के लिए कठिन है। अली इमाम नकवी का यह कमाल है कि उन्होंने इस उपन्यास में उस वर्ग के जीवन-संघर्ष को उन्हीं की भाषा में उतारा।
वरिष्ठ साहित्यकार हृदयेश मयंक ने अली इमाम नकवी के साथ बिताए पलों को साझा किया और श्रमिक वर्ग तथा सेठों के घरों में काम करने वाले स्त्री-पुरुष नौकरों के जीवन-संबंधों के अंतर्द्वंद्व पर अपनी बात रखी।
उपन्यास के अनुवादक अनवर मिर्जा ने संक्षेप में कहा कि उपन्यास के विषय से प्रभावित होकर उन्होंने इसे हिंदी में लाने का निश्चय किया, ताकि यह एक बड़े तबके तक पहुंच सके।
ड्रामा निगार और फिल्म निर्देशक इकबाल नियाजी ने उपन्यास पर बड़े रोचक अंदाज में वक्तव्य दिया। शैलेश सिंह ने अली इमाम नकवी के साथ बिताई स्मृतियां साझा कीं। उर्दू लेखक और रंगकर्मी असलम परवेज ने अली इमाम नकवी की कहानियों पर वक्तव्य दिया। सुबोध मोरे ने मुंबई के कामगार वर्ग को केंद्र में रखकर लिखे गए मराठी साहित्य की चर्चा की।
इस अवसर पर राकेश शर्मा, जे. आर. यादव, पुलक चक्रवर्ती, कल्पना महापुस्कर, राजेश विक्रांत, डॉ. रीता दास राम, राजीव रोहित, कबीर खान, सैयद जिया हैदर नकवी, मिथिलेश प्रियदर्शी, फिरोज खान, संदीप माने, मुस्तहसन आज्म, जाकिर सरदार, समीर त्र्यंबक, शिरीष हाटे, कल्पना उबाले, कल्पना पांडे, बेबी नाज, वसीम अकील शाह, संजय पांडे, दिनेश गुप्ता समेत अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन जलेस महाराष्ट्र के सचिव डॉ. मुख्तार खान ने किया। जलेस मुंबई के अध्यक्ष संजय भिसे ने आभार व्यक्त किया।

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