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22 साल पुराने ‘मोर प्रतिमा चोरी मामले’ पर सुप्रीम कोर्ट में 2 सितंबर को सुनवाई

सामना संवाददाता / चेन्नई

मायलापुर स्थित ऐतिहासिक श्री कपालेश्वर मंदिर की कथित प्राचीन मोर प्रतिमा चोरी और उसे बदलने के मामले में उद्योगपति वेनू श्रीनिवासन की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दो दशक से अधिक पुराने इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट 2 सितंबर 2026 को एक अहम सुनवाई करने जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की एडवांस कॉज लिस्ट के मुताबिक, सामाजिक कार्यकर्ता और मंदिर भक्त रंगराजन नरसिम्हन की ओर से दायर याचिका SLP (Crl.) No. 7650/2024 सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इस मामले में वेनू श्रीनिवासन और एक अन्य व्यक्ति पक्षकार हैं। मामले की जड़ वर्ष 2004 में कपालेश्वर मंदिर में हुए जीर्णोद्धार कार्य से जुड़ी है। आरोप है कि इस दौरान मंदिर की एक प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व वाली मोर प्रतिमा को कथित तौर पर बिना वैधानिक अनुमति के बदल दिया गया। इसी आरोप ने बाद में एक बड़े आपराधिक और कानूनी विवाद का रूप ले लिया।

वेनू श्रीनिवासन उस समय मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े सरकार द्वारा गठित एक समिति से संबद्ध थे। श्रीनिवासन का नाम बाद में इस मामले की जांच और कानूनी कार्यवाही के दौरान सामने आया। हालांकि, उन्होंने लगातार किसी भी तरह की चोरी या प्रतिमा के कथित अनधिकृत बदलाव में अपनी भूमिका से इनकार किया है।

विवाद ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब तमिलनाडु आइडल विंग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल की, जिसमें श्रीनिवासन समेत अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए। इसके बाद मामला अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई का विषय बन गया।श्रीनिवासन को शुरुआत में अग्रिम जमानत मिली थी। फरवरी 2024 में उन्हें बड़ी राहत मिली, जब मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। लेकिन यह राहत अंतिम साबित नहीं हुई।

इस मामले को वर्षों तक आगे बढ़ाने वाले एक्टिविस्ट रंगराजन नरसिम्हन का आरोप रहा है कि मंदिर की मूल प्राचीन मोर प्रतिमा को अवैध तरीके से बदल दिया गया। आरोपों के बाद एफआईआर दर्ज हुई और मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा। रंगराजन नरसिम्हन ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी चुनौती के कारण अब यह सवाल फिर देश की सर्वोच्च अदालत के सामने है कि क्या श्रीनिवासन के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का हाई कोर्ट का फैसला कायम रहेगा।

2 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का रुख इस मामले की आगे की दिशा तय कर सकता है। अगर हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा जाता है तो श्रीनिवासन को मिली राहत कायम रहेगी। लेकिन यदि सुप्रीम कोर्ट एफआईआर रद्द करने के आदेश को पलटते हुए कार्यवाही बहाल करता है, तो 22 साल पुराना ‘मोर प्रतिमा चोरी मामला’ एक बार फिर उनके लिए गंभीर कानूनी चुनौती बन सकता है। अब सबकी नजर 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी है।

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