अश्रुधारा ठहर न पायेगी
बाँध टूटा तक बाढ़ आयेगी
देख सौतन से कुछ मती कहियो
खींचकर ये ही पी को लायेगी
श्वास जैसी सखी नहीं कोई
संग आयी है संग जायेगी
इससे अमृत की आस मत रखना
प्रीत बिसपान ही करायेगी
माना सागर अनन्त है लेकिन
ओस की बूँद काम आयेगी
वास्तविकता से उसको क्या लेना
अप्सरा स्वप्न ही दिखायेगी
-(बहुभाषी शायर नवीन सी. चतुर्वेदी)
