सामना संवाददाता / नई दिल्ली
क्या अब देश में चुनाव आयोग से सवाल पूछना भी पुलिस पूछताछ का कारण बन सकता है? क्या सोशल मीडिया पर किसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को सुबह की सैर से ही पुलिस अपने साथ ले जा सकती है? पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह आशीष जोशी से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा घंटों की गई पूछताछ ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर ऐसे ही कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत सरकार में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके आशीष जोशी बुधवार सुबह दिल्ली के नेहरू पार्क इलाके में मॉर्निंग वॉक पर थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारी उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए। रिपोर्टों के मुताबिक, उनसे सोशल मीडिया पर की गई कुछ पोस्ट को लेकर करीब नौ से दस घंटे तक पूछताछ की गई। देर शाम उन्हें घर पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि मामला चुनाव आयोग से जुड़ी उनकी सोशल मीडिया टिप्पणियों से संबंधित है। पुलिस सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा १९२ के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, अब तक पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम और विवादित पोस्ट को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। यह मामला केवल चुनाव आयोग का भी नहीं है। सवाल उस लोकतांत्रिक वातावरण का है जिसमें नागरिक सरकार, संस्था या सत्ता से असहमति व्यक्त कर सके। लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं माना जा सकता और आलोचना को अपने आप कानून-व्यवस्था का प्रश्न बना देना भी उचित नहीं होगा। लेकिन यदि पूरा मामला सिर्फ तीखी राजनीतिक या संस्थागत आलोचना तक सीमित है, तो फिर सवाल बेहद असहज है, क्या इस सरकार में चुनाव आयोग से सवाल पूछने की कीमत अब दस घंटे की पुलिस पूछताछ है? लोकतंत्र सवालों से मजबूत होता है, सवाल पूछने वालों को डराने से नहीं।
सीएम रेखा गुप्ता से सवाल पूछना पड़ा भारी?
सवाल पूछने गईं महिला पत्रकारों पर पुलिसिया कार्रवाई?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने के लिए उनके पास जाने के बाद दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की है। शाहीन ने दावा किया कि पुलिस ने उनकी पहचान मुस्लिम के तौर पर करने के बाद कथित मारपीट और बढ़ा दी।
`पत्नी को सूचना देने की अनुमति तक नहीं मिली’
पूर्व आईएएस जोशी ने पूछताछ से लौटने के बाद आरोप लगाया कि उन्होंने पुलिस से कई बार अपनी पत्नी को यह बताने की अनुमति मांगी कि वे कहां हैं, लेकिन उन्हें परिवार को सूचना नहीं देने दी गई। उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से जवाब मिला कि वे केवल मिले हुए निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
