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अब ड्राइविंग लाइसेंस पर गडकरी की ‘वक्र दृष्टि’! …नियम तोड़ा तो मिलेंगे नेगेटिव पॉइंट, ज्यादा हुए तो लाइसेंस सस्पेंड या रद्द

जनता का पलटवार—चालक की रेटिंग तो होगी, गड्ढों वाली सड़क बनाने वालों की नेगेटिव रेटिंग कब?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
ई-२० पेट्रोल, टोल और ट्रैफिक नियमों को लेकर पहले से परेशान वाहन चालकों पर अब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की नई ‘वक्र दृष्टि’ पड़ने वाली है। सरकार बार-बार यातायात नियम तोड़ने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस पर नेगेटिव पॉइंट जोड़ने की तैयारी कर रही है। एक निश्चित सीमा तक अंक पहुंचने पर लाइसेंस पहले निलंबित और गंभीर मामलों में रद्द तक किया जा सकेगा। इसके लिए मोटर वाहन कानून में बदलाव की तैयारी है।
गडकरी के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था खास तौर पर आदतन नियम तोड़ने वालों के लिए होगी। हर उल्लंघन पर नेगेटिव अंक जुड़ेंगे और तय सीमा पार होते ही कार्रवाई होगी। सरकार का तर्क है कि इससे सड़क पर अनुशासन बढ़ेगा और बार-बार नियम तोड़ने वालों पर लगाम लगेगी। लेकिन इस घोषणा के साथ सोशल मीडिया और वाहन चालकों के बीच दूसरा सवाल भी तेजी से उठ रहा है। अगर खराब ड्राइविंग पर चालक की नेगेटिव रेटिंग होगी तो खराब सड़क बनाने और उसकी देखरेख करने वाले तंत्र की रेटिंग कौन करेगा?
देश के अनेक शहरों में मानसून के बाद गड्ढों, उखड़े डामर और टूटी सड़कों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। दिल्ली में बारिश के बाद कई प्रमुख मार्गों पर गड्ढों और क्षतिग्रस्त हिस्सों ने वाहन चालकों की मुश्किल बढ़ाई है, जबकि नागपुर नगर निगम ने ही शहर में १,२८२ गड्ढों की गणना की है। यहीं से गडकरी की नई व्यवस्था पर व्यंग्य शुरू हो गया है। सवाल पूछा जा रहा है कि गलत लेन, तेज रफ्तार या सिग्नल तोड़ने पर चालक को अंक मिलेंगे, लेकिन गड्ढे में गिरकर वाहन खराब हो जाए, सड़क धंस जाए या घटिया निर्माण के कारण दुर्घटना हो तो ठेकेदार और संबंधित अफसर के खाते में कितने नेगेटिव पॉइंट जुड़ेंगे।
गडकरी खुद हाल में कह चुके हैं कि राज्य सरकारों की सड़क खराब होने पर भी दोष उन्हें दिया जाता है। उन्होंने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का उदाहरण देकर अपने काम का बचाव किया था। सड़क सुरक्षा के लिए सख्ती जरूरी है, लेकिन वाहन चालकों का सवाल भी उतना ही सीधा है कि जवाबदेही सिर्फ स्टीयरिंग पकड़ने वाले की होगी या सड़क बनवाने वालों की भी। फिलहाल सरकार ड्राइवर का ‘रिपोर्ट कार्ड’ बनाने चली है; जनता पूछ रही है, ‘मंत्रीजी, सड़कों का रिपोर्ट कार्ड कब बनेगा?

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