कभी भारत सरकार में एडिशनल सेक्रेटरी रैंक तक पहुंचे,
अब एक पोस्ट ने खड़ा किया सत्ता के भीतर मतभेद का सवाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
नौकरशाही के भीतर की ‘ग्रेपवाइन’ सार्वजनिक करना पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आशीष जोशी को भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बुधवार को उनसे करीब नौ घंटे पूछताछ की। जोशी १९९२ बैच के इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस अधिकारी रहे हैं और ३१ मार्च २०२६ को भारत सरकार में एडिशनल सेक्रेटरी रैंक से सेवानिवृत्त हुए। दूरसंचार विभाग में वे कंट्रोलर ऑफ कम्युनिकेशंस समेत कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
जोशी की पहचान केवल एक सेवानिवृत्त अफसर की नहीं है। लंबे प्रशासनिक अनुभव के बाद वे सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक भी रहे हैं। २०१९ में कपिल मिश्रा के एक विवादित वीडियो पर कानूनी कार्रवाई की मांग करने के बाद उन्हें निलंबन का सामना भी करना पड़ा था।
अब विवाद उनके १३ अगस्त के उस पोस्ट को लेकर गरमाया है, जिसमें उन्होंने ‘सिविल सर्विसेज ग्रेपवाइन’ के नाम पर दावा किया कि जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री और गृह सचिव के बीच ‘बड़ा टकराव’ हुआ था। जोशी ने यह भी दावा किया कि गृह सचिव और कुछ मैदानी अधिकारी पुलिस कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे। उक्त पोस्ट बाद में भारत में कानूनी मांग के चलते रोक दिया गया। दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक जोशी से उनकी कथित ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े मामले में पूछताछ हुई और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
