सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति में सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मंत्री गणेश नाईक के बीच बढ़ती राजनीतिक तनातनी ने नया मोड़ ले लिया है। दोनों नेताओं के बीच ठाणे और आसपास के इलाकों में राजनीतिक प्रभाव और वर्चस्व को लेकर जारी खींचतान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुटीले अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं को बड़ा और समझदार नेता बताते हुए फडणवीस ने खुद को इस विवाद से अलग रखने की कोशिश की।
फडणवीस से जब पूछा गया कि एकनाथ शिंदे और गणेश नाईक में से उन्हें सबसे ज्यादा समझदार कौन लगता है, तो उन्होंने कहा कि दोनों ही समझदार हैं और दोनों बड़े नेता हैं। इसके बाद चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि ‘इन बड़े नेताओं के बीच मेरा क्या काम?’ फडणवीस के इस बयान को दोनों नेताओं के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान से उनकी दूरी के तौर पर देखा जा रहा है।
ठाणे के वर्चस्व ने बढ़ाई महायुति की बेचैनी
एकनाथ शिंदे और गणेश नाईक के बीच राजनीतिक मतभेद कोई नया विषय नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में यह टकराव ज्यादा खुलकर सामने आया है। ठाणे और आसपास के इलाकों में राजनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों खेमों की गतिविधियां महायुति के भीतर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एकनाथ शिंदे का ठाणे से लंबे समय से राजनीतिक जुड़ाव रहा है, वहीं गणेश नाईक भी नवी मुंबई और ठाणे क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं। ऐसे में स्थानीय राजनीति में प्रभाव और संगठनात्मक वर्चस्व को लेकर दोनों नेताओं के बीच बढ़ती खींचतान महायुति के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है।
फडणवीस ने दोनों के पाले में डाली गेंद!
फडणवीस का बयान महज मजाकिया टिप्पणी नहीं माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जिस तरह दोनों नेताओं को ‘बड़ा नेता’ और ‘समझदार’ बताया तथा खुद को इस विवाद से अलग रखा, उसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। महायुति सरकार में मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास है, जबकि एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री हैं और गणेश नाईक मंत्री हैं। ऐसे में दोनों के बीच बढ़ते मतभेद पर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की उम्मीद की जा सकती थी। लेकिन फडणवीस ने फिलहाल सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय गेंद दोनों नेताओं के पाले में डाल दी है।
