मुख्यपृष्ठनए समाचारविचित्र सिस्टम, विचित्र प्रशासन!..सवालों के घेरे में जिला पंचायत विदिशा की व्यवस्था

विचित्र सिस्टम, विचित्र प्रशासन!..सवालों के घेरे में जिला पंचायत विदिशा की व्यवस्था

दीपक तिवारी / विदिशा

जिले में पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण को लेकर प्रशासन भले ही बड़े-बड़े अभियान चलाने और लाखों पौधे लगाने के दावे करता हो, लेकिन जिम्मेदारियों के बंटवारे ने अब इन अभियानों की गंभीरता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला जिला पंचायत विदिशा से जुड़ा है, जहां सीईओ को पौधारोपण अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यवस्था में अधिकारी अपने ही कार्यालय परिसर में लगाए गए पौधों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित नहीं कर पाए, उन्हीं अधिकारी को जिले के पौधारोपण अभियान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपना आखिर किस सोच का परिणाम है?
तस्वीर में कार्यालय परिसर/परिसर से जुड़े क्षेत्र में उखड़े हुए पेड़-पौधे और अस्त-व्यस्त स्थिति साफ दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब छोटे स्तर पर लगाए गए पौधों का संरक्षण नहीं हो पा रहा, तो जिलेभर में लगाए जाने वाले हजारों पौधों की जियो-टैगिंग, सुरक्षा, सिंचाई और जीवित रहने की निगरानी किस तरह सुनिश्चित होगी?
पौधे लगाना आसान, बचाना मुश्किल!
हर साल पौधारोपण अभियान के दौरान सरकारी विभागों द्वारा बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं। फोटो खिंचती हैं, लक्ष्य पूरे होने के आंकड़े सामने आते हैं और अभियान की सफलता के दावे किए जाते हैं। लेकिन असली सवाल पौधे लगाने के बाद शुरू होता है-कितने पौधे जीवित बचे?
यही वजह है कि जिला पंचायत के सीईओ को नोडल अधिकारी बनाए जाने के निर्णय को लेकर अब प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या जिम्मेदारी सिर्फ पौधे लगाने की है?
पौधारोपण अभियान का नोडल अधिकारी वह होता है जिसके कंधों पर अभियान की निगरानी और क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने नोडल अधिकारी की नियुक्ति से पहले उनके अधीनस्थ परिसर में पौधों के संरक्षण की स्थिति का भी आकलन किया था?
सामना का सवाल
“जब अपने कार्यालय के पौधे ही नहीं बच पाए, तो जिले के पौधों को बचाने की जिम्मेदारी कैसे निभेगी?” विचित्र सिस्टम और विचित्र प्रशासन-अब देखना यह है कि पौधारोपण अभियान में पौधे कितने लगते हैं और कितने बचते हैं।

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